16 अक्तूबर 2009

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धन सम्पदाम् ।
असद् बुद्धि विनाशाय दीपज्योति नमोस्तु ते।।

नवगीत की पाठशाला सम्मिलित होने वाले सभी गीतकारों का अभिनन्दन ,और ज्योति पर्व की अग्रिम शुभकानायें। कार्यशाला ४ में आये नवगीतों में से कुछ बहुत अच्छे नवगीत थे।निर्मला जोशी, शशि पाधा, आचार्य संजीव सलिल, अमित और धर्मेन्द्र कुमार सिंह सज्जन जिनके नवगीतों को अनुभूति में प्रकाशन के लिये चुना गया है ये सभी पहले से ही सिद्धहस्त नवगीतकार हैं किन्तु जिन लोगों ने प्रथम वार नवगीत लिखने का प्रयास किया है उनका कथ्य तो बहुत अच्छा है पर नवगीत की मान्य परम्परा की कसौटी पर खरे नहीं उतरे।वैसे तो इस पाठशाला में अनेक लेखों के माध्यम से नवगीत के विषय में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध करा दी गयी है,फिर भी कुछ श्रेष्ठ नवगीतकारों के विचार यहाँ प्रस्तुत हैं। आशा है कार्यशाला ५ में भाग लेने वाले नवीन रचनाकार सभी लेखौं को पढकर बहुत अच्छे नवगीत पाठकों को दे पायेंगे।
-शास्त्री नित्यगोपाल कटारे


आज नवगीत जिस बिन्दु पर सहज विकास क्रम में आया है,वहाँ तक पहुँचने के लिये उसे काफी आन्तरिक संघर्ष करना पड़ा है।शिल्प के स्तर पर जहाँ छन्द,लय,ताल के बन्धनों को नवगीत ने ढीला किया है,वहीं संवेदना के स्तर पर अभिधा से लक्षणा व्यंजना और इकहरेपन से बहुआयामिता की ओर भी वह उन्मुख हुआ है। गेयता के स्तर पर उसकी यात्रा शास्त्रीयता से सुगमता की ओर रही है। गीत की यह विकास यात्रा सहज और स्वाभाविक है। गीत का यह विकसित और अधुनातन स्वरूप ही नवगीत है।
-योगेन्द्र दत्त शर्मा


नवगीत की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह छन्दाश्रित और लयात्मक है जससे वह लोक मानस में सहज ही स्थान प्राप्त
कर लेता है।उसमें न तो शास्त्रीय संगीत वाली शब्दातीत नाद योजना है , न सुगम संगीत जैसी शब्दाश्रित रागबद्धता और फिल्मी गीतों जैसी काव्यहीन गायकी । नवगीत ऐसा काव्य है,जो अपनी नाद योजना के कारण सस्वर पठनीय है। जाने पहचाने बिम्बों की भाषा में अभिव्यक्त होने के कारण पाठकों श्रोताओं को सहज बोधगम्य और स्मृति ग्राह्य है। सामान्य जन के दुख दर्द की आवाज होने के कारण लोकप्रिय है ,और अपने काव्यत्व के कारण विद्वानों द्वारा समादरणीय है।
-शम्भुनाथ सिंह

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढिया !!
    पल पल सुनहरे फूल खिले , कभी न हो कांटों का सामना !
    जिंदगी आपकी खुशियों से भरी रहे , दीपावली पर हमारी यही शुभकामना !!

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  2. इसमें शतांश भी शक नहीं है कि नवगीत की पाठशाला गुरोत्तर अग्रसर है,
    रचनाओं की भाषा, गहनता और उद्देश्यपूर्ण अभिव्यक्ति प्रत्येक कार्यशाला को संग्रहणीय बना रहे हैं.
    आयोजलों और रचनाकारों को बधाई.
    "दीपावली" पर्व की आपको सपरिवार मंगल भावनाएँ. आपका जीवन स्वस्थ्य ,शतायु और यशस्वी हो.
    -विजय तिवारी " किसलय " जबलपुर ".

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  3. आदरणीय पूर्णिमा जी, दादा कटारे जी, श्रद्धेय व्योम जी और समस्त मित्रों को दीपोत्सव की कोटि-कोटि नवगीतमय शुभकानाएं.

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  4. दीप की ज्योति सा ओज आपके जीवन में बना रहे इस कामना के साथ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। आपकी बुद्धि में गणेश की छाया,घर में लक्ष्मी की माया और कलम में सरस्वती का वास रहे।
    *Happy Deepavali*

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