नवगीत पाठशाला- १५ में शामिल मेरे दोनों नवगीतों को जिस स्नेह से कवि-बन्धुओं ने स्वीकारा-दुलारा, उसके लिए मैं उन सभी का आभारी हूँ। 'अभिव्यक्ति-अनुभूति' परिवार का भी आभार, जिन्होंने मेरी कविताओं को सबके लिए सुलभ बनाया। नवगीतों की इस पाठशाला में नये कथ्य और उसकी कहन की कई नई बानगियों से परिचय हुआ। कुछ रचनाओं को छोड़कर अधिकांश ने प्रभावित किया। मेरा एक विनम्र निवेदन है पाठशाला के संयोजक-संपादकों से कि वे विषय तो दें, किन्तु इसे समस्या-पूर्ति की तरह किन्हीं शब्दों या वाक्यांशों से बाँधें नहीं। संभवतः कई समर्थ और स्थापित नवगीत-रचनाकार इसी बंदिश की वज़ह से पाठशाला से जुड़ने में संकोच करते हैं और उनकी प्रेरक एवं समृद्ध कहन से नये रचनाकार वंचित रह जाते हैं। साथ ही इससे एक प्रकार के रीतिकालिक काव्य-विधान को भी बल मिलता है। आज की कविता सहजता की हिमायती है और उसकी स्वाभाविकता ही उसकी पहचान है।
स्नेह-नमन सहित
आपका
कुमार रवीन्द्र
