15 मार्च 2011

१६. होली है होली

रंग की फुहार में,
फ़ागुनी बयार में
बच्चे जवान बूढ़े कर रहे ठिठोली
मानिए न आज बुरा, होली है होली

छटा में गुलाल-रंग
भिगो रहे अंग-अंग
गीत गा लुभाय रही मस्तों की टोली
मानिए न आज बुरा, होली है होली

आज न कोई दूर है
प्यार भरपूर है
रिश्तों में है मिठास गुझिया ने घोली
मानिए न आज बुरा, होली है होली


भूल राग और द्वेष
भूल देश और भेष
सबका मन मोह रही कोयल की बोली
मानिए न आज बुरा, होली है होली

- हितेश शर्मा 'पथिक'

6 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर होली गीत बधाई और शुभकामनाएं |

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  2. इस बार तो एक से बढ़ कर एक नवगीत पढ़ने का मौका मिला| गीतकारों के साथ साथ पूर्णिमा जी आप को भी बहुत बहुत बधाइयाँ|

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  3. बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति| धन्यवाद|

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  4. इस सुन्दर होली गीत हेतु आपको हार्दिक बधाई. साथ ही आपको तथा पूर्णिमा जी को होली की शुभकामनाएं भी.

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  5. बहुत सुंदर गीत, हितेश जी को बहुत बहुत बधाई

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