11 अप्रैल 2011

१०. समाचार है

बैठ मुड़ेरे चिड़िया चहके'
समाचार है
सोप-क्रीम से जवां दिख रही
दुष्प्रचार है

बिन खोले- अख़बार जान लो,
कुछ अच्छा, कुछ बुरा मान लो
फर्ज़ भुला, अधिकार माँगना-
यदि न मिले तो जिद्द ठान लो

मुख्य शीर्षक अनाचार है
और दूसरा दुराचार है
सफे-सफे पर कदाचार है-
बना हाशिया सदाचार है

पैठ घरों में टी. वी. दहके
मन निसार है


अब भी धूप खिल रही उज्जवल
श्यामल बादल, बरखा निर्मल
वनचर-नभचर करते क्रंदन-
रोते पर्वत, सिसके जंगल

घर-घर में फैला बजार है
अवगुन का गाहक हजार है
नहीं सत्य का चाहक कोई-
श्रम सिक्के का बिका चार है

मस्ती, मौज-मजे का वाहक
असरदार है

लाज-हया अब तलक लेश है
चुका नहीं सब, बहुत शेष है
मत निराश हो बढ़े चलो रे-
कोशिश अब करनी विशेष है

अलस्सुबह शीतल बयार है
खिलता मनहर हरसिंगार है
मन दर्पण की धूल हटायें-
चेहरे-चेहरे पर निखार है

एक साथ मिल मुष्टि बाँधकर
संकल्पित करना प्रहार है

-संजीव सलिल
(जबलपुर)

10 टिप्‍पणियां:

  1. //घर-घर में फैला बजार है
    अवगुन का गाहक हजार है
    नहीं सत्य का चाहक कोई-
    श्रम सिक्के का बिका चार है//

    बहुत सुन्दर नवगीत आचार्य सलिल जी ! मैं इसे बार बार गुनगुना रहा हूँ ! बधाई स्वीकार करें !

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  2. आपको पढ़ना जैसे एक पूरे अनुभव को बटोर लेना है
    अच्छा लगा...
    सुंदर समाचारों के साथ ....
    भावपूर्ण सुंदर नवगीत के लियें . ...

    आपको बधाई....
    नमन...

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  3. आचार्य जी की कलम से निकला, जीवन के हर पहलू को छूता शानदार नवगीत। आचार्य जी को हार्दिक बधाई

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  4. आपकी रचना अच्छी लगी. बधाई स्वीकारें.

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  5. धन्यवाद.
    शमा प्रभाकर सज्जन चिंतित
    हावी सिंह पर क्यों सियार है?
    हैं अगीत के चंद पक्षधर
    'सलिल' गीत चाहक हजार है..

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  6. आचारी जी का नवगीत यानि सीखने के लिए एक खजाना| आप के नवगीतों में सदैव ही भांति भांति के शब्द प्रयोगों के साथ साथ सामाजिक विसंगतियों का सफल निरूपण भी रहता है| हम जैसे नए बच्चों के लिए आप कि रचनाएँ सदैव ही प्रारना स्रोत का काम करती हैं| नमन सलिल जी|

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  7. घर-घर में फैला बजार है
    अवगुन का गाहक हजार है
    नहीं सत्य का चाहक कोई-
    श्रम सिक्के का बिका चार है
    bahut sunder
    ek ek pankti sunder hai
    saader
    rachana

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  8. मुख्य शीर्षक अनाचार है
    और दूसरा दुराचार है
    सफे-सफे पर कदाचार है-
    बना हाशिया सदाचार है
    --
    बिल्कुल सही!
    यही तो है आज समाचार पत्रों में!

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