गीत भेजते समय ध्यान रखें कि-
१.गीत टिप्पणी में न भेजें बल्कि इस पते पर भेजें- manoshi@gmail.com
२. गीत भेजने की अंतिम तिथि है ३० अप्रैल, २००९।
३. अप्रैल माह के लिये आमंत्रित गीत के मुखड़े में निम्नलिखित पंक्ति आना ज़रूरी है - प्यार का रंग न बदला। उदाहरण के लिए नचिकेता का एक गीत प्रस्तुत है-
प्यार का रंग न बदला
दुनिया बदली
मगर प्यार का रंग नहीं बदला

अब भी
खिले फूल के अन्दर
खुशबू होती है
गहरी पीड़ा में अक्सर हाँ
आँखें रोती हैं
कविता बदली, पर
लय-छंद-प्रसंग नहीं बदला
वर्षा होती
आसमान में बादल
घिरने पर
पात बिखर जाते हैं
जब भी आता है पतझर
पर पेड़ों से
पत्तों का आसंग नहीं बदला
हरदम भरने को उड़ान
तत्पर रहती पाँखें
मौसम आने पर
फूलों से
लदती हैं शाख़ें
बदली हवा
सुबह होने का ढंग नहीं बदला
हरदम भरने को उड़ान
जवाब देंहटाएंतत्पर रहती पाँखें
मौसम आने पर
फूलों से
लदती हैं शाख़ें
बदली हवा
सुबह होने का ढंग नहीं बदला
bahut badhiya rachana .dhanyawad.
सबसे पहले नव गीत की पाठशाला की पूरी टीम को इस नई पहल के लिए बधाई.
जवाब देंहटाएंनिश्चित र्रोप से इस पाठशाला से जुड़कर खासतौर पर नवागन्तुक बहुत कुछ सीखेंगे.
- विजय तिवारी 'किसलय'
शुभकामनाएं नई शुरुआत के लिए .............
जवाब देंहटाएं’एक बार और जाल फेंक रे मछेरे
जवाब देंहटाएंजाने किस मछली में बंधन की चाह हो’
पूरा गीत मिल सकेगा मुझे?
यह नवगीत अपनी मिसाल आप है...कथ्य, शिल्प, बिम्ब, भाव, रस, लय और प्रतीक हर तत्व संतुलित है. एक भी शब्द निरर्थक नहीं है.
जवाब देंहटाएंकैसा भ्रम है
जवाब देंहटाएंअविरल क्रम है
हर पल, क्षण सब कुछ बदला है
मेरा मन तो नहीं मानता
प्यार का रंग नहीं बदला है।।
कितने धोखे
छल, प्रपंच हैं
मक्कारों से भरे मंच हैं
झूठों की झूठी दुनिया में
झूठे ही बन गए पंच हैं
झूठ कहेंगे
झूठ सहेंगे
झूठ की खातिर
झूठ लिखेंगे
झूठ-नगर के कोलाहल में
झूठों का परचम बदला है
चलो जूठ ही लिख देता हूँ
"प्यार का रंग नहीं बदला है" ।।
-अनाम