14 जून 2009

१२- द्वारचार कर जाती गरमी

सोचो, जानो और समझ लो,
कैसे है सह जाती धरनी।
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी।

अक्सर शांत समुन्दर ने ही,
तूफां का आगाज किया है।
कठिन डगर चलने वाले को,
मंजिल ने सरताज किया है।

काम लगन से करने वालों,
मीठे फल है लाती करनी।
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी।

उजियारा होने से पहले,
होती है अंधियारी रात।
दुख के पीछे सुख आयेगा,
लगती कितनी प्यारी बात।

बुरे वक्त में अच्छा सोचो,
दिल में है आ जाती नरमी।
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी।

जीवन जीना एक कला है,
उससे यूँ घबराना कैसा।
धूप छांव के बीच रहा है,
रिश्ता अजब पुराना जैसा।

भावी खुशियों के खातिर ही,
पीड़ा है पड़ जाती सहनी।
रिमझिम बारिश के आने का,
द्वारचार कर जाती गरमी।
--समीर लाल 'समीर'

20 टिप्‍पणियां:

  1. साकारात्मक सोच से लबरेज़ यह गीत अच्छा लगा।
    अति सुन्दर, रवानगी लिये हुये,
    रचयिता को मुबारक हो

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  2. सघन विचारयुक्त इस गीत में नवगीत के लक्षण कम ही हैं। थोड़ा सा प्रयास करके इसे नवगीत की श्रेणी में लाया जा सकता है। रचनाकार ने काफी परिश्रम किया है यह स्पष्ट है।

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  3. "द्वाराचार " शब्द प्रयोग
    अनोखा और सरस लगा
    इस नवगीत मेँ और
    ये प्रयास भी अच्छा लगा
    - लावण्या

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  4. आज पहली बार इस ब्लोग पर आना हुआ. बहुत सुन्दर गीत लगा. सकारात्मक भावों के साथ प्रवाह अद्भुत है. बहुत बधाई.

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  5. नवगीत के लिखने के ढंग को अभी मैं समझने की कोशिश में लगी हूँ .इस लिए इस पर आने वाली हर नयी पोस्ट को पढ़ती जरुर हूँ ..यह गीत भी सरस अच्छा लगा ..इस में तो जीवन के प्रति सकारात्मक भाव है वह आकर्षित करते हैं ...एक ही लय में पढना सुखद लगा ..पर कहीं कहीं थोडा सा अटकाव भी महसूस हुआ ..बाकी तो गुणी जन ही बता पायेंगे ..जो दिल को भाये वह अच्छा है ..और यह गीत दिल को भाया .

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  6. पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुवा है........... बहूत ही खूबसूरत है,
    aashaa का sanchaar करती huyee रचना हैं ये......... रचना में gaat की तरह गाये जाने वाली रवानगी है......... हर छंद लाजवाब है.......... ऊर्जा का संचार करती रचना

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  7. GEET KAA SARVPRATHAM NIYAM HAI USMEIN
    LAY KAA HOONA,SARITA KA PRAVAH
    HONAA.GEETKAAR NE GEET MEIN AESE
    MADHUR SHABDON KAA ISTEMAAL KIYAA
    HAI JO BHARPOOR SANGEET PAIDA KARTE
    HAIN.BHAA AUR SHABD DONO HEE UTKRISHT HAIN.SANGEETKAAR BADEE
    PYAAREE DHUN BANAA SAKTA HAI IS
    GEET PAR.GEETKAR KO MEREE NAANAA
    BADHAAEEYAN.

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  8. रिमझिम बारिश के आने का,
    द्वारचार कर जाती गरमी.

    वाह क्या सुंदर गीत रचा गया है. कल्पना शक्ति और भाव अभिव्यक्ति की बेमिसाल रचना..उपरोक्त दो लाईने तो कमाल की हैं. बस जैसे वर्तमान मौसम को भी समेट लिया है.

    रचनाकार जो भी हों, उनको मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई.

    रामराम.

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  9. बहुत ही उम्दा! सरल और सहज गीत!! गीतकार को हार्दिक बधाई!!

    आखों मे जो पानी ला दे,
    वो सच्ची कविता होती है
    चाहे शब्द सरल हो इसके
    भावों को दिल मे बोती है!

    ये कविता बिल्कुल ऐसी है,
    इतनी बात है मुझको कहनी!
    रिमझिम बारिश के आने का,
    द्वारचार कर जाती गरमी. !!!
    ----

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  10. यह एक अच्छा संदेश वाहक गीत है। परम्परागत उपदेशों से परिपूर्ण इस गीत की सम्पूर्ण शैली भी पारम्परिक और पूर्ण अनुशासित है। कवि में पूर्ण क्षमता है नवगीत लिखने की ।

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  11. बहुत ही सुन्दर गीत लगा. द्वारचार का ऐसा प्रयोग अद्भुत रहा. कभी इतनी सृजनता से सोचा ही नहीं था. कितनी सकारात्मकता है पूरे गीत में. गीतकार को बहुत बधाई और आगे पढ़ने की चाह रहे्गी.

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  12. उजियारा होने से पहले,
    होती है अंधियारी रात.
    दुख के पीछे सुख आयेगा,
    लगती कितनी प्यारी बात

    " गीत की हर पंक्ति जैसे जीवन की सच्चाई को अंकित कर रही है......दुःख के बाद सुख, कठिन डगर के बाद मंजिल......धूप के बाद छांव हर बोल जीवन के पल पल से जुडा हुआ है....इस गीत को पढ़ कर एक सुखद सा एहसास मन को छु गया......सकारात्मक उर्जा से लबरेज ये गीत गीतकार की जीवन के प्रति उमंग , और आस्था को शब्द प्रदान करता सा लगा...."
    regards

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  13. बडा सुंदर गीत है. इसके सहज बोल इसकी सुंदरता और माधुर्य को बढा रहे है.शुभकामनाएं.

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  14. ये कविता बिल्कुल ऐसी है,
    इतनी बात है मुझको कहनी!
    रिमझिम बारिश के आने का,
    द्वारचार कर जाती गरमी. !!!

    bahut sundar geet.

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  15. बात समझ में आई पूरी
    लेखक है अपना सहधर्मी
    इसीलिये जब गीत पढ़ा तो
    जाग गई भावों में गर्मी

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  16. बहुत सुन्दर गीत पढ़ने को मिला. नवगीत की पाठशाला का आभार व्यक्त करता हूँ.

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  17. गीत पढ़ कर बस यह भाव उभरे --


    "धूप छाँव सी संग संग रह्ती
    आशा और निराशा
    फिर भी क्यों न समझ मैं पाई
    जीवन की परिभाषा"

    एक आशावादी सोच के साथ उमंग भरा जीवन जीने का संदेश देती हुई सुन्दर रचना । बहुत बहुत बधाई।

    शशि पाधा

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  18. भावी खुशियों के खातिर ही,
    पीड़ा है पड़ जाती सहनी.
    sunder geet hai

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  19. इतने सरल गीत में इतने गंभीर भाव !!

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