25 अप्रैल 2010

कार्यशाला : ०८ : कुछ महत्त्वपूर्ण बातें

कुछ महत्त्वपूर्ण बातें
इस बार विषय की घोषणा के बाद नवगीतों के प्रकाशन से पहले एक बार फिर आपसे कुछ बातें करने का मन किया, तो यह पोस्ट लेकर गई।

कार्यशाला : ०८ के लिए प्राप्त नवगीतों का प्रकाशन २९ अप्रैल से प्रारंभ किया जाएगा। एक-एक करके सभी नवगीत भारतीय मानक समय के अनुसार शाम ७:०० बजे प्रकाशित किए जाएँगे।

उन सबके लिए, जो अभी तक कार्यशाला : ०८ के लिए स्वरचित नवगीत नहीं प्रेषित कर सके हैं, एक शुभसूचना यह है कि इसके लिए वे अपने नवगीत ३० अप्रैल २०१० तक प्रेषित कर सकते हैं। जिन रचनाकारों ने दूसरा नवगीत भी तैयार कर लिया है और उन्हें लगता है कि वह भी "नवगीत की पाठशाला" पर प्रकाशन के योग्य है, तो वे उसे भी भेज सकते हैं।

जैसा कि विदित है : "नवगीत की पाठशाला" पर आयोजित कार्यशालाओं में प्रकाशनार्थ प्राप्त नवगीतों में से चयनित श्रेष्ठ नवगीतों को "अनुभूति" पर भी प्रकाशित किया जाता है। हमेशा की तरह कार्यशाला : ०८ के लिए प्राप्त नवगीतों में से भी चयनित श्रेष्ठ नवगीतों को "अनुभूति" पर प्रकाशित किया जाएगा।

लेकिन जो गीत पहले ही रचनाकारों ने अपने ब्लाग्स पर प्रकाशित कर दिए हैं उन्हें "अनुभूति" पर प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा। इसलिए यदि रचनाकार चाहते हैं कि उनका नवगीत अनुभूति पर प्रकाशित न हो, तो वे उसे पहले से अपने व्यक्तिगत ब्लॉग्स पर प्रकाशित कर सकते हैं।

इस बीच ऐसे जो रचनाकार अपने नवगीतों को अपने व्यक्तिगत ब्लॉग्स से हटाकर इस बात की सूचना प्रेषित कर देंगे, उनके नवगीतों के "अनुभूति" पर प्रकाशन हेतु विचार किया जा सकता है।

लगभग सभी रचनाकारों ने अच्छा प्रयास किया है और कुछ का प्रयास तो बहुत अच्छा है, जो नवगीत पढ़ते ही पता चल जाएगा। यह बात तो सर्वविदित है कि "नवगीत की पाठशाला" पर केवल नवगीत ही प्रकाशित किए जाते हैं, फिर भी इस बात से अनभिज्ञ कतिपय रचनाकारों ने नवगीतों के स्थान पर कविताएँ प्रेषित कर दी हैं।

नए रचनाकारों को भी यह बात सदैव स्मृति में रखनी चाहिए कि "नवगीत की पाठशाला" केवल नवगीतों के प्रकाशन और विकास के लिए ही बनाई गई है। अत: इस पर प्रकाशन के लिए किसी अन्य विधा में रचना नहीं प्रेषित करनी चाहिए।

कुछ रचनाकार हिंदी यूनिकोड फ़ॉण्ट से देवनागरी लिपि में नवगीत न भेजकर अन्य फ़ॉण्ट्स में भेज देते हैं, जिससे उन्हें यूनिकोड में परिवर्तित करने में कभी-कभी बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। कुछ रचनाकार पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन या किसी अन्य जटिल फ़ाइल में टाइप करके भेज देते हैं। ऐसी फ़ाइल्स तो कभी-कभी खुल ही नहीं पाती हैं।

ऐसे रचनाकारों से अनुरोध है कि वे हिंदी यूनिकोड के अतिरिक्त किसी अन्य फ़ॉण्ट के प्रयोग की स्थिति में कृतिदेव ०१० का और फ़ाइल के रूप में केवल एम. एस. वर्ड या नोट पैड का ही प्रयोग किया करें। जिन रचनाकारों के पास कृतिदेव ०१० फ़ॉण्ट उपलब्ध नहीं है, वे हमें लिखें। यदि मंगल फ़ॉण्ट में लिखने में कठिनाई है, तो यूनीनागरी पृष्ठ का प्रयोग किया जा सकता है।

"नवगीत की पाठशाला" संपूर्ण विश्व के नवगीतकारों का साझा मंच है। दूर-दूर बसे रचनाकारों के नवगीत यहाँ एक साथ दृष्टिगोचर होते हैं। मैं चाहती हूँ कि सबको यह भी पता चले कि कौन-सा नवगीतकार विश्व के किस अंचल में रहता है। कहने का तात्पर्य यह है कि प्रकाशित नवगीत के साथ कम से कम रचनाकार के शहर या गाँव, जनपद, राज्य और देश का नाम तो प्रकाशित होना ही चाहिए। पर यह कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। न चाहनेवाले रचनाकार का पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा।

कुछ रचनाकारों ने तो अपना पूरा पता भेज ही रखा है। जिन रचनाकारों ने प्रेषित नवगीतों के साथ अपना पता नहीं लिखा है, उनसे अनुरोध है कि अविलंब भेज दें।

प्रकाशित होने से पहले यदि कोई परिवर्तन या सुधार ध्यान में आ जाए, तो अवश्य अवगत कराएँ।

एक वादा है इस बार - अगली कार्यशाला के विषय की प्रतीक्षा आपको बिल्कुल भी नहीं करनी पड़ेगी।

पुन: मंगलमय शुभकामनाएँ -
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पूर्णिमा वर्मन

4 टिप्‍पणियां:

  1. इस तरह तो आपको कई-कई बार आना चाहिए।
    आपकी बातों से सबको बहुत प्रेरणा और शक्ति मिलती है।

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  2. नवगीत की पाठशाला पर ऐसी सूचनाएँ
    समय-समय पर प्रकाशित होना बहुत आवश्यक है!
    आपकी इस पोस्ट से भूली हुई कुछ बातें याद आ गईं!
    नए रचनाकारों को इससे नई दिशा मिलेगी!

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