1 अप्रैल 2011

१. यही आज का समाचार है


उठापटक के खेले चलते
हुआ अखाड़ा सभागार है
यही आज का समाचार है

दिन विपदा के परजा भुगते
शाहों के घर बजें बधावे
रामराज घर-घर व्यापेगा-
रहे खोखले उनके दावे

टका सेर के खाजे का
परजा को अब भी इंतज़ार है
यही आज का समाचार है

ठूँठ-हुए पीपल पर बैठी
गौरइया के पंख जले हैं
खबर सुर्ख़ियों में है आई-
बड़के राजा बड़े भले हैं

उनके पाले गीधों ने
उत्पात मचाया द्वार-द्वार है
यही आज का समाचार है

नौटंकी में लँगड़ी नटिनी
राज्यलक्ष्मी बनी रात कल
कोख धरा की सूनी-बंजर
फटा हुआ है माँ का आँचल

इन्द्रप्रस्थ की अप्सराओं के
चेहरों पर अद्भुत निखार है
यही आज का समाचार है

-कुमार रवीन्द्र

14 टिप्‍पणियां:

  1. कितना तीखा व्यंग्य, कितना सधा शिल्प और कितनी रवानगी है इस रचना में। सब कुछ एक साथ। अनेक समकालीन परिस्थितियों का यथार्थ चित्रण एक गीत में बहुत खूब। यह नवगीत की पाठशाला की सफलता है। बधाई और शुभ कामनाएँ

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  2. आदरणीय कुमार रवीन्द्र जी आपका गीत बहुत ही सुंदर है |पत्र -पत्रिकाओं में आपके गीत पढता रहता हूँ |आपका मोबाइल न० चाहिए मेरा न० है -09415898913

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  3. व्यवस्था पर करारा व्यंग्य है शुभकामनाएं

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  4. bahut santulit abhivyakti. samyik yathrth par prahar kartee rachna hetu sadhuvad.

    samachar hee navachar hai.
    ya kahiye yah kadachar hai.
    drishti thopate apnee sab par-
    yah pravritti bhee durnivaar hai..

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  5. बहुत सुन्दर नवगीत है आपका. मेरी बधाई स्वीकारें.

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  6. अद्भुत, उत्तम, विशेष रूप से प्रासंगिक और लोक मानस के काफ़ी क्लोज़ है ये नवगीत भाई रवीन्द्र कुमार जी का| मन गदगद हो गया|

    बड़ा ही मीठा और सीधा कलेजे को चीर के रख देने वाला तंज़ भी है| एक अजीब सी छटपटाहट भी साथ लिए बढ़ता है ये नवगीत|

    पूर्णिमा जी आप को फिर से बहुत बहुत साधुवाद जो आप इतने सुंदर सुंदर नवगीतों को प्रस्तुत करवा रही हैं| रवीन्द्र भाई आप की लेखनी को नमन|

    रोला छन्द पर बतियाने के लिए यहाँ पधारिएगा :- http://samasyapoorti.blogspot.com/2011/04/blog-post.html

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  7. फिर से एक अभिभूत कर देने वाली अभिव्यक्ति ...
    बधाई आपको रवीन्द्र जी ....

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  8. बहुत सुन्दर आगाज़ हुआ है

    बढ़िया नवगीत, पसंद आया ख़ास कर ये पंक्तियाँ

    "नौटंकी में ..."

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  9. अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि इस कार्यशाला का प्रारंभ वरिष्ठ नवगीतकार कुमार रवीन्द्र जी के नवगीत से हो रहा है। आगे भी इस कार्यशाला में कुछ प्रसिद्ध नामों से सदस्यों का परिचय होगा। सभी को सादर धन्यवाद।
    - पूर्णिमा वर्मन

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  10. आज का ताज़ा समाचार...
    बहुत बढ़िया,--

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  11. बड़के राजा बड़े भले हैं - बहुत सुंदर प्रतीकात्मक कटाक्ष है । बधाई रवींद्र जी ।

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  12. टका सेर खाजे का क्या सुन्दर व्यंग है
    बहुत सुन्दर नव गीत
    सादर
    रचना

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  13. बहुत ही सुंदर नवगीत है पढ़कर मजा आ गया। कुमार रवींद्र जी को बहुत बहुत बधाई इतना सुंदर नवगीत लिखने के लिए और पूर्णिमा जी को बहुत बहुत बधाई इसे प्रस्तुत करने के लिए।

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  14. आदरणीय रवीन्द्र जी,
    अभूतपूर्व रचना है...नवगीतों में वेब पर शायद ही कहीं ऐसी समसामयिकता दिखती है, जैसी इस पाठशाला में हैं और जब यहाँ आप जैसे वरिष्ठ रचनाकार पधारने लगे हैं तो जैसे सोने में सुहागा।
    दिन विपदा के परजा भुगते
    शाहों के घर बजें बधावे
    रामराज घर-घर व्यापेगा-
    रहे खोखले उनके दावे

    अन्ना हजारे आज ही अनशन पर बैठे हैं आशा रखें कि ये नवरात्र अच्छा फलदेने वाले हों। रामनवमी को राम सुध लें और रामराज के दावे सफल रहें। ढेरों बधाई इस सुंदर रचना के लिये।

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