27 अप्रैल 2011

२७. सुनें समाचार, बंधु

राजा के
घर में है
हर दिन त्योहार, बंधु
सुनें समाचार, बंधु

विपदाएँ सारी ही
परजा के भाग बदीं
राजा का दोष नहीं
नदियाँ हैं कीच-लदीं

चढ़ा प्रजा के
सिर पर
कर्ज़े का भार, बंधु
सुनें समाचार, बंधु

रामराज रहा सिर्फ
पुरखों के किस्से में
आया वनवास सदा
सीता के हिस्से में

लक्ष्मण जा बसे
-खबर -हैं
सागर-पार, बंधु
सुनें समाचार, बंधु

शहज़ादा चतुर बड़ा
गली-गाँव घूम रहा
सबके घर भरें-पुरें
उसने हर जगह कहा

जहाँ गया
वहीं सभी
उजड़े घर-बार, बंधु
सुनें समाचार, बंधु

--कुमार रवीन्द्र

9 टिप्‍पणियां:

  1. शहज़ादा चतुर बड़ा
    गली-गाँव घूम रहा
    सबके घर भरें-पुरें
    उसने हर जगह कहा

    जहाँ गया
    वहीं सभी
    उजड़े घर-बार, बंधु
    सुनें समाचार, बंधु

    ओह ऐसा विरोधाभास

    लाजवाब लयात्मकता की वजह से एक सांस में पूरा गीत पढ़ गया

    बहुत पसंद आया

    कृपया गीतकार का नाम भी लिखें

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  2. कुमार रविन्द्र जी को इस बहुत ही अच्छी रचना के लिए बधाई देता हूँ. सच में एक सांस में पढ़ गया मैं भी.

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  3. रवीन्द्र जी के गीतों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। जैसे जब सचिन बल्लेबाजी करते हैं तो बैटिंग आसान लगने लगती है वैसे रवीन्द्र जी जब गीत लिखते हैं तो लगने लगता है कि गीत लिखना कितना आसान है। पूर्णिमा जी का बहुत बहुत धन्यवाद ये नवगीत पढ़वाने के लिए।

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  4. कुमार रवीन्द्र जी का यह नवगीत अत्यन्त प्रवाहमय और आज के दौर की विषम परिस्थितियों पर करारा प्रहार है । साथ ही किसी भी नए रचनाकार के लिए आदर्श भी ।

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  5. विमल कुमार हेड़ा।28 अप्रैल 2011 को 12:23 pm

    व्यंग बाण छोड़ता हुआ गीत पढ़ कर अच्छा लगा, कुमार रवीन्द्र जी को बहुत बहुत बधाई
    धन्यवाद।
    विमल कुमार हेड़ा।

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  6. उत्तम नवगीत. सच में बहुत ही सुन्दर रचना है..पढने और समझने में बिलकुल सरल.

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  7. रामराज रहा सिर्फ
    पुरखों के किस्से में
    आया वनवास सदा
    सीता के हिस्से में

    लक्ष्मण जा बसे
    -खबर -हैं
    सागर-पार, बंधु
    सुनें समाचार, बंधु
    प्रवाहमय गीत .आपके गीतों से हमको बहुत कुछ सिखने को मिलता है .शब्दों का प्रयोग, बिम्ब ,प्रवाह सब कुछ
    धन्यवाद
    सादर
    रचना

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  8. नवगीत पाठशाला- १५ में शामिल मेरे दोनों नवगीतों को जिस स्नेह से कवि-बन्धुओं ने स्वीकारा-दुलारा, उसके लिए मैं उन सभी का आभारी हूँ| 'अभिव्यक्ति-अनुभूति' परिवार का भी आभार, जिन्होंने मेरी कविताओं को सबके लिए सुलभ बनाया| नवगीतों की इस पाठशाला में नये कथ्य और उसकी कहन की कई नई बानगियों से परिचय हुआ| कुछ रचनाओं को छोड़कर अधिकांश ने प्रभावित किया |

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