29 अक्तूबर 2012

१०. बच्चों की आँखों में दीवाली

जगमग झालर दिये
सभी ने बिगड़ी बात बना ली
चमक उठी नटखट बच्चों की
आँखों में दीवाली

भोले
उल्लासों से जैसे हिला मिला लगता था
आज सुबह का सूरज कितना खिला खिला लगता था
साँझ ढले खिल गयी दियों में
सूरज की वह लाली

चकरी है
अनार भी है, है बम राकेट चटाई
नकली गन से ही मुन्नू ने कितनी धूम मचाई
देख फुलझड़ी छोटी गुड़िया
बजा रही है ताली

विधि विधान
से श्रद्धा से सबकी पूजा पाती है
आँगन में लक्ष्मी गणेश की मूरत मुस्काती है
अम्मा के हाथों में सजती है
पूजा की थाली

– रवि शंकर मिश्र रवि

15 टिप्‍पणियां:

  1. साँझ ढले खिल गयी दियों में
    सूरज की वह लाली
    बहुत सुंदर कल्‍पना मिश्रजी। सुंदर नवगीत के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. अम्मा के हाथोँ से सजती है
    पूजा की थाली ।
    सुन्दर नवगीत के लिए रविशंकर जी को बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार सुरेन्द्रपाल जी

      हटाएं
  3. सुंदर नवगीत के लिए रविशंकर जी को बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर नवगीत । बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर नवगीत के लिए बधाई रविशंकर जी

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियों का हार्दिक स्वागत है। कृपया देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करें।