20 मई 2013

१. निम्बिया की हरी हरी छाँव


दफ्तर की छुट्टी ले
चलो चले गाँव.
ओढें फिर निम्बिया की
हरी हरी छाँव

छोड़ छाड़
सुविधा के मखमल गलीचे
अंतहीन भाग-दौड़ गुणा-भाग पीछे
छुप्पमछुपाई करें शाखों के नीचे
मौजों की गैया के खोल
दे गिरांव

नकफुसरी
सुधियों को धोएँ नहलायें
टूथपेस्ट छोड़ आज दातुन चबायें
छाल घिसें मुन्नी के घाव पर लगायें
बीने निंबौली जो गिरी
ठाँव ठाँव

पत्तों
टहनियों से बातें पुरानी
सवा सेर गेहूँ में खटती जवानी
पूँछें कि टपका क्यों आँखों से पानी
कैसे सहो एकाकी मौसम
के दाँव

रामशंकर वर्मा
(लखनऊ)

18 टिप्‍पणियां:


  1. पत्तों
    टहनियों से बातें पुरानी
    सवा सेर गेहूँ में खटती जवानी
    पूँछें कि टपका क्यों आँखों से पानी

    बहुत सुन्दर नवगीत !

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    1. प्रोत्साहन के लिए आभार बंधुवर.

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  2. कृष्ण नन्दन मौर्य21 मई 2013 को 10:00 am

    मौजों की गैया के खोल
    दे गिरांव
    सुधियों को धोएँ नहलायें
    पत्तों
    टहनियों से बातें पुरानी ...
    वाह .... बहुत सुन्दर गीत

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    1. हार्दिक आभार कृष्णनंदन जी.

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  3. नीम एक वृक्ष से बढ़कर भी हमारी जीवन शैली और संस्कृति का अभिन्न अंग है।
    सून्दर भाव और स्मृतियोँ भें झांकता नवगीत।
    हार्दिक बधाई रामशंकर जी।

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    1. नवगीत का मर्म उद्घाटित करने के लिए ह्रदय से आभार सुरेन्द्रपाल जी.

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  4. वाह वाह! हर अंतरा लाजवाब
    हार्दिक बधाई राम शंकर जी...

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    1. स्नेह के लिए आभारी हूँ कल्पना जी.

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  5. छोड़ छाड़
    सुविधा के मखमल गलीचे
    अंतहीन भाग-दौड़ गुणा-भाग पीछे
    छुप्पमछुपाई करें शाखों के नीचे
    मौजों की गैया के खोल
    दे गिरांव .........बहुत सुन्दर अभिलाषा ज़ाहिर की है इन पंक्तियों में ...सच में ही मन गिनतियों की आवाज़ के साथ छुपने को दौड़ पड़ रहा सा लगता है .....सुन्दर गीत मिट्टी का सोंधापन लिए हुए ...बधाई रामशंकर जी

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    1. आपके प्रोत्साहन से मेरा प्रयास और उद्देश्य सफल हुआ बंधुवर. आभार ह्रदय से.

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  6. अच्छे नवगीत के लिए रामशंकर जी को बधाई

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    1. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद भाई.

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  7. बहुत सुंदर नवगीत ...
    मन को छू गया ..

    बधाई रमाशंकर जी ..

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    1. प्रशंसा और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार गीता जी.

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  8. छोड़ छाड़
    सुविधा के मखमल गलीचे
    अंतहीन भाग-दौड़ गुणा-भाग पीछे ...बहुत सुन्दर रचना रामशंकर जी

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  9. उत्साहवर्धन के लिए आभार मिश्र जी.

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  10. हार्दिक आभार मिश्र जी।

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