17 जून 2013

कार्यशाला-२८ फूल चम्पा के

चम्पा का फूल हमारे साहित्य संस्कृति और इतिहास की धुरी में रहा है। नाटकों, कथाओं और कविताओं में इसका खूब उल्लेख हुआ है। बौद्ध धर्म से घनिष्ठता होने के कारण यह दक्षिण एशिया के बौद्ध मंदिरों में बहुतायत से पाया जाता है। अपने रंग, रूप, घनी छाया और साफ सुथरी काया के कारण यह आज भी बहुत से घरों की शोभा है। नवगीतकारों ने भी इसको अपनी रचना का विषय बनाया है। तो इस बार कार्यशाला का विषय यही चंपा का फूल है। कार्यशाला में प्राप्त चुने हुए श्रेष्ठ नवगीत अनुभूति के चंपा विशेषांक में १ जुलाई को प्रकाशित किये जाएँगे। रचना भेजने की अंतिम तिथि थे २५ जून और पता है-

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर विषय है , नयी नयी रचनाएं पढने मिलेंगी ऐसी उम्मीद है.
    - विजय तिवारी "किसलय "

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  2. बहुत ही सुंदर आयोजन! मुझे भी इस कार्यशाला से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

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  3. आपके अनूठे कार्य के लिए मंगल कामनाएं !!

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