17 अगस्त 2013

९. देश हमारा पालक


आज देश की टेर लगी ...
क्यों तूने सुधि बिसराई है?
देश हमारा पालक है
किसको सुध इसकी आयी है

सिर पर हिम का ताज सजा
सागर भी पाँव पखारे है
गंगा जमुना पावन जल
कावेरी भी इतरायी है
देश हमारा पालक है
किसको सुध इसकी आयी है

देख तिरंगा मन झूमे
माटी को झुककर चूमे
इस झण्डे का सार बचे
अब आन की यही लड़ाई है
देश हमारा पालक है
किसको सुध इसकी आयी है

-बृजेश नीरज
लखनऊ

7 टिप्‍पणियां:

  1. बृजेश जी, इस सरस, सुमधुर सुंदर गीत के लिए आपको हार्दिक बधाई

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    1. दीदी, यह तो आपके मार्गदर्शन का ही परिणाम है।

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  2. मेरे प्रयास को इस मंच पर स्थान प्रदान किया गया, इसके लिए मैं बहुत आभारी हूँ!

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. अच्छे गीत के लिए बृजेश जी को बधाई

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