24 दिसंबर 2013

१४. नये साल में नयी मुरादें

तुड़ी-मुड़ी चिट्ठी के जैसा
लगता साल पुराना ।

कोरा कागज बना लकीरें
कितनी आड़ी-तिरछी,
तुतली बातें लिखती गुड़िया
मन से अच्छी-अच्छी,
छोटे-छोटे सपने लेते
सुंदर रूप सलोना,
पंख लगा कर नई उड़ानें
भरते नन्हें पंछी
खिली-खिली सी धूप छेड़ती
फिर इक नया तराना ।

गई रात के पट चिपका कर
खिड़की से दिन उगता,
आशाओं का छौना सूरज
अंगड़ाई ले जगता,
दूर-दूर तक झकमक राहें
नया जोश भर देतीं,
नये साल में नई मुरादें
लिये मुसाफिर चलता,
खट्टी मीठी बांध पोटली
आगे सफ़र सुहाना।

तुड़ी-मुड़ी चिट्ठी के जैसा
लगता साल पुराना ।

--मानोशी
(कैनाडा)

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपके इस नवगीत से गुजरना भला-भला सा लगा है, मानोशी जी. प्रस्तुत नवगीत में अंतरधारा की तरह सतत प्रवहमान अदम्य आशा का बहाव मनोरम है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.
    सादर

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  2. कोरा कागज बना लकीरें
    कितनी आड़ी-तिरछी,
    तुतली बातें लिखती गुड़िया
    मन से अच्छी-अच्छी,
    छोटे-छोटे सपने लेते
    सुंदर रूप सलोना, ................. सुन्दर

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  3. कोरा कागज बना लकीरें
    कितनी आड़ी-तिरछी,
    तुतली बातें लिखती गुड़िया
    मन से अच्छी-अच्छी,
    छोटे-छोटे सपने लेते
    सुंदर रूप सलोना,.... सुंदर

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  4. तुड़ी-मुड़ी चिट्ठी के जैसा
    लगता साल पुराना ।...........आशाओं का छौना सूरज....................खट्टी मीठी बांध पोटली
    आगे सफ़र सुहाना। .................सुन्दर उपमान और आशावाद से भरा सुन्दर गीत

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