28 जुलाई 2014

३३. सावन की पहली बारिश - सुरेन्द्र सुकुमार

सावन की पहली बारिश ने
मन मेरा शीतल कर डाला
तुमको बहुत
शुक्रिया बादल

मैंने भी मनुहार बहुत की
और बहाए अश्रु धरा ने
तब जाकर पिघले तुम प्यारे
तुमने गाये आज तराने

गर्जन राग तुम्हारा सुन के
मन मेरा सरगम कर डाला
तुमको बहुत
शुक्रिया बादल

माना पर्यावरण बिगाड़ा
धरती खोदी जंगल काटा
और अधिक दौलत पाने को
हमने तेरा तन मन बाँटा

हमको फिर भी क्षमा कर दिया
खुशिओं से आँगन भर डाला
तुमको बहुत
शुक्रिया बादल

- सुरेन्द्र सुकुमार

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