3 फ़रवरी 2010

कार्यशाला-७ वसंत या फागुन

कोहरा या कुहासा विषय पर आधारित नवगीतों की छठी कार्यशाला अब तक की सबसे सफल कार्यशाला रही। विषय, मौसम और रचनाएँ सभी समयानुकूल रहे। प्रतिभागियों को उत्साह प्रशंसनीय रहा और कुछ नए लोग भी पाठशाला से जुड़े। कार्यशाला से चुने गए १६ नवगीत अनुभूति के १ फरवरी के अंक में प्रकाशित किए गए जो अब तक किसी भी कार्यशाला से लिए गए गीतों में सबसे अधिक है।
अगली कार्यशाला का विषय फागुन या वसंत रखा गया है। दोनों में से किसी भी एक शब्द का रचना में आना आवश्यक है। यह ज़रूरी नहीं कि यह शब्द मुखड़े में ही हो लेकिन गीत वसंत के मौसम से किसी न किसी तरह जुड़ा ज़रूर होना चाहिए। नवगीत के लिए आवश्यक है कि नए बिम्ब, नया छंद और जन सामान्य से जड़ा विषय रचना में लिया जाए। गीत में तीन से अधिक अंतरे न तो अच्छा रहेगा। कार्यशाला-७ के लिए रचनाएँ भेजने की अंतिम तिथि १५ फरवरी २०१० है। पिछली कुछ कार्यशालाओं पर विद्वानों की राय नहीं आ पाई है इसका खेद है। कार्यशाला छह के नवगीतों को भी हमने विद्वानों के पास भेजा है। आशा है उनकी राय इस बार हमें ज़रूर मिलेगी। नयी कार्यशाला की अनेक शुभकामनाओं के साथ -पूर्णिमा वर्मन

10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह कार्यशाल्ला ७ की घोषणा हो गई , विषय भी मौषम के अनुरूप है नए नए गीत पढने को मिलेंगे, बहुत बहुत शुभकामनाओ के साथ, धन्यवाद
    विमल कुमार हेडा

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  2. इस बार के विषय और कार्यशाला का स्वागत है |

    अवनीश तिवारी

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  3. हर वसंती पल हुआ ख़ुश,
    हर सुमन ने ऋतु सँवारी!
    गुनगुनाती फागुनी धुन,
    आज मौसम की खुमारी!
    --
    स्वागत है - नई कार्यशाला का!

    --
    मुझको बता दो -
    "नवसुर में कोयल गाता है - मीठा-मीठा-मीठा! "
    --
    संपादक : सरस पायस

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  4. Karyashala ke sabhi sansadhak adarniy gurujano yatha shastri Nityagopal Katare,Dr. Jagdish vyom v Poornimaji ko is saras udghoshna ke lie shukriya.Beshak yeh karyashala team members ke sadprayason se kuchh jyada hi guljar hogi.sabhi ko meri taraf se VELENTINE ki agrim subhkamnaen.

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  6. "नवगीत की पाठशाला" से संबंधित
    सभी साथियों के लिए
    "महाशिवरात्रि पर हार्दिक शुभकामनाएँ!"

    --
    कह रहीं बालियाँ गेहूँ की, मेरे लिए!

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  7. आम्र कुञ्ज में नव कोंपल
    अरु आम्र बौर है आई
    यह कैसी मधु भरी पीक ने
    पंचम तान सुनाई
    मेरे मन मंदिर में जैसे
    गूँज उठी शहनाई...
    आज बसंत बधाई
    सब को आज बसंत बधाई....

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