25 फ़रवरी 2010

१२-महुए की डाली पर उतरा बसंत : अजय पाठक

संयम के टूटेंगे फिर से अनुबंध,
महुए की डाली पर उतरा बसंत।
मधुबन की बस्ती में,
सरसिज का डेरा है।
सुमनों के अधरों तक,
भँवरों का फेरा है।
फुनगी पर गुंजित है, नेहों के छंद।
महुए की डाली पर उतरा बसंत।

किसलय के अंतर में,
तरुणाई सजती है।
कलियों के तनमन में,
शहनाई बजती है।
बहती, दिशाओं में जीवन की गंध।
महुए की डाली पर उतरा बसंत।

बौरों की मादकता,
बिखरी अमरैया में,
कुहु की लय छेड़ी,
उन्मत कोयलिया ने।
अभिसारी गीतों से, गुंजित दिगंत।
महुए की डाली पर उतरा बसंत।

सरसों के माथे पर,
पीली चुनरिया है।
झूमे है रह रहकर,
बाली उमरिया है।
केसरिया रंगों के, झरते मकरंद।
महुए की डाली पर उतरा बसंत।

बूढ़े से बरगद पर,
यौवन चढ़ आया है।
मन है बासंती पर,
जर्जर-सी काया है।
मधुरस है थोड़ा, पर तृष्णा अनंत।
महुए की डाली पर उतरा बसंत।

--
अजय पाठक

8 टिप्‍पणियां:

  1. "अति सुंदर दृश्य!
    मधुबन की बस्ती में,
    सरसिज का डेरा है।
    सुमनों के अधरों पर
    भँवरों का फेरा है।
    कलियों के तनमन में,
    शहनाई बजती है।
    उन्मत कोयलिया ने।
    अभिसारी गीतों की
    मधुर लय छेड़ी".

    वाह क्या कहना
    अति मधुर!

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  2. बूढ़े से बरगद पर,
    यौवन चढ़ आया है।
    मन है बासंती पर,
    जर्जर-सी काया है।
    मधुरस है थोड़ा, पर तृष्णा अनंत।
    महुए की डाली पर उतरा बसंत।
    bahut sunder geet jeevan ki gandh aakarshit karti hai

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  3. "फुनगी पर गुंजित है, नेहों के छंद
    महुए की डाली पर उतरा बसंत।"

    इस गीत का आरम्भ ही मन को आकर्षित करता है और फिर सभी शब्द चित्र मनोरम। पूरे नवगीत ने एक समा बाँध लिया है । बधाई तथा धन्यवाद ।
    शशि पाधा

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  4. सुन्दर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई
    धन्यवाद
    विमल कुमार हेडा

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  5. फुनगी पर गुंजित है, नेहों के छंद!


    आहा....

    सुंदर लय बद्ध गीत...आभार और बधाई आपको.....

    सस्नेह
    गीता

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  6. "mahue ki dali par utra basant"
    Ajayji mahue ki madakta se shayed hi koi bach paya hai phir basant ispar utre bina kaise rah sakata hai,ye bat aur hai mhue ke bahane ap ne is gane me sab kuchh utaar diya hai
    badhaee

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  7. बौरों की मादकता,
    बिखरी अमरैया में,
    कोयलिया, चुनरिया, उमरिया जैसे शब्द नव गीत में प्राण फूंकते है.
    'मधुरस है थोड़ा, पर तृष्णा अनंत। क्या बात है...

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  8. अंतिम पद की बात निराली,
    मधुर हुआ प्रारंभ!
    बहुत सुंदर है भाई,
    दे रहे बहुत बधाई!

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