18 मार्च 2010

३१- लो वसंत आ गया : अरविंद राज

मौसम के नाम लिखे,
तरुओं ने जब अपने
नवपत्र खोले,
कजरारी कोयलिया
उनको पढ़ बोले -
लो वसंत आ गया!

हंसदल कमलयुक्त
तालों की लहरों से
कर रहे किलोलें,
अभिगुंजन करते
भँवरे ख़ुश हो डोलें,
लो वसंत आ गया!

मलयज के संग-संग
महक रहे खेतों पर
पंछी पर तोलें,
फागुन के स्वागत में
ऋतु ने रंग घोले,
लो वसंत आ गया!

--
अरविंद राज
शाहजहाँपुर (उ.प्र.)

8 टिप्‍पणियां:

  1. इस अपूर्व नवगीत की
    प्रत्येक पंक्ति से
    छलकती सरसता का पान करके
    मन इसे गुनगुनाए बिना नहीं रह पाता!
    --
    जितना मनोहारी प्रारंभ हुआ,
    उतना ही मनभावन अंत!
    --
    पर नवगीत को पढ़कर लगता ही नहीं
    कि इसका अंत भी हो रहा है!
    --
    प्रति पल यही अनुभूति होती है -
    लो वसंत आ गया!

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  2. अभिनव संकल्पना, प्रांजल शब्दावली. सटीक बिम्ब मगर देशजता? अच्छा प्रयास.

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  3. बहुत ही सुन्दर व मनभावन नवगीत । लगता है अभी अभी तुरन्त हमारे आस-पास बसन्त घटित हो रहा है । शब्दों का सुन्दर संयोजन । यह रचना मुझे बहुत हीं पसंद आयी । अरविंद जी को बहुत बहुत शुभकामनायें इस सुन्दर नवगीत के लिये । आभार

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  4. मौसम के नाम लिखे,
    तरुओं ने जब अपने
    नवपत्र खोले,
    कजरारी कोयलिया
    उनको पढ़ बोले -
    लो वसंत आ गया!

    हंसदल कमलयुक्त
    तालों की लहरों से
    कर रहे किलोलें,
    अभिगुंजन करते
    भँवरे ख़ुश हो डोलें,
    लो वसंत आ गया!
    sabke man ko bha gaya
    Arvindji apka yah geet is karyshala ke lie ek anutha tohfa hai. bas silsila pyaar ka yon hi bana rahe,thankyou.

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  5. अरव्न्द राज जी!
    आपका नवगीत इस निधा की
    सभी मर्यादाओं पर खरा उतरता है!
    सुन्दर रचना के लिए बधाई!

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  6. मौसम के नाम लिखे,
    तरुओं ने जब अपने
    नवपत्र खोले,
    कजरारी कोयलिया
    उनको पढ़ बोले -
    लो वसंत आ गया!

    और ये गीत सब के मन को भा गया, अच्छे गीत के लिए अरविन्द जी को बहुत बहुत बधाई , धन्यवाद

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  7. कजरारी कोयलिया
    उनको पढ़ बोले -
    लो वसंत आ गया!
    हंसदल कमलयुक्त
    तालों की लहरों से
    कर रहे किलोलें,
    अभिगुंजन करते
    भँवरे ख़ुश हो डोलें,
    लो वसंत आ गया!

    इस नवगीत में तो वसन्त का सुन्दर शब्द चित्रण है।
    बधाई तथा धन्यवाद।

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