18 मई 2010

२० : तुम भी एक निशाना साधो : शंभू शरण मंडल

रहोगे कब तक निशाने पर?
तुम भी एक निशाना साधो,
हावी हो न रावण, उसकी
नाभी पे बस बाण चला दो।

जल में, थल में और गगन में,
खेत, झोपड़ी, ताजमहल में,
साहस और बलिदान के बल पर,
टूट रहा विश्वास जगा दो।

छलनी हो न ताज, नरीमन,
दहले न मुंबई और लंदन,
दहशत है गर धूप जेठ की,
बरसो बनकर सावन-भादो।

मिट जाए मनहूस ठिकाने,
निकले बस निर्भीक तराने,
रंगोली की गोली बरसे,
एक ऐसी बंदूक बना दो।
--
शं
भु शरण मंडल
धनबाद, झारखंड (भारत)

7 टिप्‍पणियां:

  1. कहो तो तुम सत्य को जी भर.
    असत को पल में मिटा दो,
    शरण में चल शम्भु की भाई-
    ज़हर को अमृत बना दो.

    अन्तर-मुखड़ा न भूलो,
    गीत गाओ, गगन छू लो,
    भदेसी भाषा, अछूते बिम्ब
    गीत सब जग को सुना दो.

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  2. विमल कुमार हेडा़19 मई 2010 को 8:45 am

    मिट जाए मनहूस ठिकाने,
    निकले बस निर्भीक तराने,
    रंगोली की गोली बरसे,
    एक ऐसी बंदूक बना दो।
    सुन्दर भावों से भरी पंक्तियाँ, शंभू जी को बहुत बहुत बधाई,
    धन्यवाद
    विमल कुमार हेडा़

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  3. छलनी हो न ताज, नरीमन,
    दहले न मुंबई और लंदन,
    दहशत है गर धूप जेठ की,
    बरसो बनकर सावन-भादो।
    बहुत बहुत बधाई,
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. जल में, थल में और गगन में,
    खेत, झोपड़ी, ताजमहल में,
    साहस और बलिदान के बल पर,
    टूट रहा विश्वास जगा दो।

    ummid se labrej is navgeet ka tahedil se swagat hai

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  5. रहोगे कब तक निशाने पर?
    तुम भी एक निशाना साधो,
    रंगोली की गोली बरसे,
    एक ऐसी बंदूक बना दो।
    एक विश्वास भऱा गीत बहुत बहुत बधाई,

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  6. भावों से भरी पंक्तियाँ
    धन्यवाद
    रंगोली की गोली बरसे,
    एक ऐसी बंदूक बना दो।

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  7. yahi jajba to hamari jijivisha ko prakat karta hai

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