16 दिसंबर 2010

५- आप हम सब खुश रहें

आप हम सब खुश रहें!

खेत खलिहानों में
पैदावार हो
हसरतों का ना कहीं
व्यापार हो
बाल बच्चों को मिले
शिक्षा अमित
बहन बेटी घूम पाएँ
भय रहित
हो तरक्की
और
नदियाँ भी बहें
आप हम सब खुश रहें।

गैर की दहलीज पर
जब जाएँ हम
मोल इज़्ज़त का
न दे के आएँ हम
बाँह फैला के
सभी को स्थान दें
साथ ही सरहद पे भी
हम ध्यान दें
ताकि भावी पीढ़ियाँ
सब सुख लहें
आप हम सब खुश रहें।

हम रहें खुश
इस तरह कुछ
इस बरस
विश्व को
आए न हम तुम पे
तरस
हम भी हैं कुछ
विश्व को
बतलाएँ हम
कंधे से कंधा मिला
बतियाएँ हम
देख तन गोरा
न स्तर से ढहें
आप हम सब खुश रहें।

नवीन चतुर्वेदी
मुंबई

18 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है नवीन भाई, नए वर्ष पर इससे अच्छी रचना और क्या हो सकती है। बधाई

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  2. आदरणीया संगीता स्वरूप जी, अनुपमा जी और मित्र धर्मेन्द्र भाई आप सभी की बहुमूल्य टिप्पणियों के लिए सहृदय आभार|

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  3. बहुत अच्छी ओर सुंदर रचना धन्यवाद

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  4. गैर की दहलीज पर
    जब जाएँ हम
    मोल इज़्ज़त का
    न दे के आएँ हम
    बाँह फैला के
    सभी को स्थान दें
    साथ ही सरहद पे भी
    हम ध्यान दें

    सार्थक सम-सामयिक पंक्तिया..... बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी पोस्ट की चर्चा कल (18-12-2010 ) शनिवार के चर्चा मंच पर भी है ...अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव दे कर मार्गदर्शन करें ...आभार .

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  6. आदरणीय आचार्य जी एवम् राज भाटिया जी आप दोनो के आशिर्वचनों से मैं अनुग्रहीत हुआ|
    आदरणीया संगीता स्वरूप जी इस अनुग्रह के लिए बारम्बार आभार|

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  7. गैर की दहलीज पर
    जब जाएँ हम
    मोल इज़्ज़त का
    न दे के आएँ हम

    बहुत भावपूर्ण अभिव्यक्ति..बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  8. आदरणीय सलिल जी और भाई सत्यम शिवम जी आभार उत्साह वर्धन के लिए

    उत्तर देंहटाएं
  9. गैर की दहलीज पर
    जब जाएँ हम
    मोल इज़्ज़त का
    न दे के आएँ हम
    बाँह फैला के
    सभी को स्थान दें
    साथ ही सरहद पे भी
    हम ध्यान दें
    ताकि भावी पीढ़ियाँ
    सब सुख लहें
    आप हम सब खुश रहें।
    ye prarthna to shayad kisi ne sochi ho aap ne bahut uttam baat kah di
    badhai
    saader
    rachana

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  10. रचना जी एवं कैलाश जी बहुत बहुत आभार उत्साह वर्धन के लिए

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  11. आदरणीय नवीनजी हम ऐसी ही नवीनता के कायल हैं जिसका बीजारोपण आपकी अनुभूति में हुआ है । हार्दिक
    शुभकामनाएं हम रहें खुश
    इस तरह कुछ
    इस बरस
    विश्व को
    आए न हम तुम पे
    तरस
    हम भी हैं कुछ
    विश्व को
    बतलाएँ हम
    कंधे से कंधा मिला
    बतियाएँ हम
    देख तन गोरा
    न स्तर से ढहें
    आप हम सब खुश रहें।

    उत्तर देंहटाएं
  12. भाई शंभू शरण मंडल जी उत्साह वर्धन के लिए बारम्बार अभिनंदन|

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  13. गैर की दहलीज पर
    जब जाएँ हम
    मोल इज़्ज़त का
    न दे के आएँ हम
    बाँह फैला के
    सभी को स्थान दें
    साथ ही सरहद पे भी
    हम ध्यान दें



    सार्थक और सुंदर प्रवाहमय रचना...

    .आभार और बधाई...


    शुभकामनाएं..

    गीता पंडित...

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  14. गीता जी उत्साह वर्धन के लिए बहुत बहुत आभार|

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