
समाचार है
अच्छा मौसम आने वाला है
भीमसेन सा
पंचम सुर में
गाने वाला है
इन्द्रधनुष की
प्रत्यंचा फिर
गगन कस रहा
हरे भरे
जंगल में आकर
हिरन बस रहा
कोई
फूलों में आकर
बतियाने वाला है
प्यासे खेत
पठार
लोकरंगों में डूबे
रेत हुई
नदियों के
रूमानी मंसूबे
कोई देकर
अपना हाथ
छुड़ानेवाला है
साँस -साँस में
गंध गुलाबी
हवा बह रही
तोड़ रहीं
छत इच्छाएं
दीवार ढह रही
भटकन में
भी कोई
राह बतानेवाला है
मन केरल की
मृगनयनी
आँखों में खोया
थका हुआ
चेहरा सागर
लहरों ने धोया
कोई काट
चिकोटी हमें
सताने वाला है
-जयकृष्ण राय तुषार
(इलाहाबाद)
कोई काट चिकोटी हमें सताने वाला है ....
जवाब देंहटाएंवाह वाह क्या बात है
तुषार जी,
प्रेम के बहुत सुन्दर रंग भर दिए आपने
लाजवाब नवगीत के लिए बहुत बहुत बधाई
--
आपका वीनस केसरी
प्रेम का समाचार देता हुआ बहुत सुन्दर गीत| तुषार जी आपको बधाई|
जवाब देंहटाएंतुषार भाई / 'मन केरल की मृगनयनी आँखों में खोया' - हाँ, यही तो है आज के नवगीत की कहन का अंदाज़ | साधुवाद ! बनाये रखें इस अंदाज़ को |
जवाब देंहटाएंकुमार रवीन्द्र
शानदार नवगीत के लिए बहुत बहुत बधाई
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रेरणादायक नवगीत, जय कृष्ण राय जी सचमुच सिद्धहस्त नवगीतकार हैं। बहुत बहुत बधाई
जवाब देंहटाएंतुषार जी, इस श्रृंखला के पहले तीन नवगीतों में राजनीतिक - सामाजिक कटाक्ष के बाद आपका नवगीत ठंडी हवा का झोंका जैसा लगा । बधाई । - ओमप्रकाश तिवारी
जवाब देंहटाएंbahut sundar navgeet hai
जवाब देंहटाएंआपक़े बिम्ब
जवाब देंहटाएंविशेष रूप से अच्छे लगे....
मनोहारी नवगीत के लियें
तुषार जी ! ......आभार और बधाई....
ओम प्रकाश जी की बातों से सहमत हूँ। ठंडी हवा का झोंका सुहाना लगा। बधाई !
जवाब देंहटाएंआदरणीय कुमार रवीन्द्र जी सहित अन्य सभी दोस्तों का आभार |यह गीत बहुत जल्दी में लिखना पड़ा था पूर्णिमा जी के डर से फिर भी आप सभी ने इसे सराहा यह आपकी महानता है |आभार
जवाब देंहटाएं*हरे-भरे गंगल में आ कर हिरण बस रहा है...............आधा गिलास भरा हुआ
जवाब देंहटाएं*कोई देकर अपना हाथ..................चेतना को जाग्रत करती पंक्ति
*केरल की मृगनयनी आँखें................... क्या बात है सर जी, बहुत ही खूब भाव चित्रण
बधाई तुषार जी, आपके नवगीतों को पढ़ना वाकई सुखद अनुभव होता है| आप के नवगीतों से हम लोग काफ़ी कुछ सीख सकते हैं|
आपका समस्या पूर्ति ब्लॉग पर स्वागत है:-
http://samasyapoorti.blogspot.com/2011/04/blog-post.html
तुषार जी,
जवाब देंहटाएंइस आशावादी नवगीत के लिये बधाई! अन्तिम बन्द विशेष रूप से अच्छा लगा।
मन केरल की
जवाब देंहटाएंमृगनयनी
आँखों में खोया
थका हुआ
चेहरा सागर
लहरों ने धोया
कोई काट
चिकोटी हमें
सताने वाला है
sunder geet
badhai
rachana
कानाफूसी हर झोंके में
जवाब देंहटाएंदीवारों के कान जगे
हर आहट पर पीछा करता
हो कोई शैतान, लगे
फूलों की मादक सुगंध में
लहरों में मत खो जाना
चुप रहना जब मुश्किल होगा,
वो दिन आने वाला है.....