4 अप्रैल 2011

४. अच्छा मौसम आने वाला है

समाचार है
अच्छा मौसम
आने वाला है
भीमसेन सा
पंचम सुर में
गाने वाला है


इन्द्रधनुष की
प्रत्यंचा फिर
गगन कस रहा
हरे भरे
जंगल में आकर
हिरन बस रहा
कोई
फूलों में आकर
बतियाने वाला है


प्यासे खेत
पठार
लोकरंगों में डूबे
रेत हुई
नदियों के
रूमानी मंसूबे
कोई देकर
अपना हाथ
छुड़ानेवाला है


साँस -साँस में
गंध गुलाबी
हवा बह रही
तोड़ रहीं
छत इच्छाएं
दीवार ढह रही
भटकन में
भी कोई
राह बतानेवाला है


मन केरल की
मृगनयनी
आँखों में खोया
थका हुआ
चेहरा सागर
लहरों ने धोया
कोई काट
चिकोटी हमें
सताने वाला है


-जयकृष्ण राय तुषार
(इलाहाबाद)

14 टिप्‍पणियां:

  1. कोई काट चिकोटी हमें सताने वाला है ....

    वाह वाह क्या बात है
    तुषार जी,
    प्रेम के बहुत सुन्दर रंग भर दिए आपने

    लाजवाब नवगीत के लिए बहुत बहुत बधाई
    --
    आपका वीनस केसरी

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  2. प्रेम का समाचार देता हुआ बहुत सुन्दर गीत| तुषार जी आपको बधाई|

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  3. तुषार भाई / 'मन केरल की मृगनयनी आँखों में खोया' - हाँ, यही तो है आज के नवगीत की कहन का अंदाज़ | साधुवाद ! बनाये रखें इस अंदाज़ को |
    कुमार रवीन्द्र

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  4. शानदार नवगीत के लिए बहुत बहुत बधाई

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  5. सुंदर प्रेरणादायक नवगीत, जय कृष्ण राय जी सचमुच सिद्धहस्त नवगीतकार हैं। बहुत बहुत बधाई

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  6. तुषार जी, इस श्रृंखला के पहले तीन नवगीतों में राजनीतिक - सामाजिक कटाक्ष के बाद आपका नवगीत ठंडी हवा का झोंका जैसा लगा । बधाई । - ओमप्रकाश तिवारी

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  7. आपक़े बिम्ब
    विशेष रूप से अच्छे लगे....
    मनोहारी नवगीत के लियें
    तुषार जी ! ......आभार और बधाई....

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  8. ओम प्रकाश जी की बातों से सहमत हूँ। ठंडी हवा का झोंका सुहाना लगा। बधाई !

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  9. आदरणीय कुमार रवीन्द्र जी सहित अन्य सभी दोस्तों का आभार |यह गीत बहुत जल्दी में लिखना पड़ा था पूर्णिमा जी के डर से फिर भी आप सभी ने इसे सराहा यह आपकी महानता है |आभार

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  10. *हरे-भरे गंगल में आ कर हिरण बस रहा है...............आधा गिलास भरा हुआ
    *कोई देकर अपना हाथ..................चेतना को जाग्रत करती पंक्ति
    *केरल की मृगनयनी आँखें................... क्या बात है सर जी, बहुत ही खूब भाव चित्रण

    बधाई तुषार जी, आपके नवगीतों को पढ़ना वाकई सुखद अनुभव होता है| आप के नवगीतों से हम लोग काफ़ी कुछ सीख सकते हैं|
    आपका समस्या पूर्ति ब्लॉग पर स्वागत है:-
    http://samasyapoorti.blogspot.com/2011/04/blog-post.html

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  11. तुषार जी,
    इस आशावादी नवगीत के लिये बधाई! अन्तिम बन्द विशेष रूप से अच्छा लगा।

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  12. मन केरल की
    मृगनयनी
    आँखों में खोया
    थका हुआ
    चेहरा सागर
    लहरों ने धोया
    कोई काट
    चिकोटी हमें
    सताने वाला है
    sunder geet
    badhai
    rachana

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  13. कानाफूसी हर झोंके में
    दीवारों के कान जगे
    हर आहट पर पीछा करता
    हो कोई शैतान, लगे

    फूलों की मादक सुगंध में
    लहरों में मत खो जाना
    चुप रहना जब मुश्किल होगा,
    वो दिन आने वाला है.....

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