24 जनवरी 2012

१०. मकर राशि के सूर्य

मकर राषि के सूर्य आज तो
लगते हैं लडडू गुड़-तिल के

इन्द्रधनुष के रंग बिखेरे
नभ में ढेरों-ढेर पतंगें
फिर मन में अंगड़ाई लेतीं
जागी ढेरों-ढेर उमंगें
उधर कहीं वीणाएं बजती
इधर बजे इकतारे दिल के

मतवाला-सा पवन घूमता
नाच रही खेतों में फसलें
जी करता है हम भी नाचें
गाएँ जोर-जोर से हँस लें
धीरे-धीरे उतर रहे हैं
ओढ़े हुए मौन के छिलके

- शशिकांत गीते

7 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. आदरणीय कल्पना जी, धन्यवाद.

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  2. विमल कुमार हेड़ा।25 जनवरी 2012 को 8:27 am

    मतवाला-सा पवन घूमता, नाच रही खेतों में फसलें
    जी करता है हम भी नाचें,गाएँ जोर-जोर से हँस लें
    धीरे-धीरे उतर रहे हैं,ओढ़े हुए मौन के छिलके
    सुन्दर पंक्तियाँ शशिकांत जी को बहुत बहुत बधाई धन्यवाद
    विमल कुमार हेड़ा।

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    1. शशिकान्त गीते25 जनवरी 2012 को 9:01 pm

      धन्यवाद, हेडा जी.

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  3. मकर राषि के सूर्य आज तो
    लगते हैं लडडू गुड़-तिल के

    सूर्य की ऐसी अनूठी उपमा पहली बार पढ़ी...

    अच्छी रचना.

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    1. शशिकांत गीते31 जनवरी 2012 को 7:36 pm

      धन्यवाद, आदरणीय शारदा मोंगा जी और आचार्य श्री संजीव वर्मा 'सलिल' जी.

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