28 मार्च 2012

९. हरसिंगार रखो

मन के द्वारे पर
खुशियों के
हरसिंगार रखो.

जीवन की ऋतुएँ बदलेंगी,
दिन फिर जायेंगे,
और अचानक आतप वाले
मौसम आयेंगे,
संबंधों की
इस गठरी में
थोडा प्यार रखो.

सरल नहीं जीवन का यह पथ,
मिलकर काटेंगे ,
हम अपना पाथेय और सुख, दुःख
सब बाँटेंगे,
लौटा देना प्यार
फिर कभी,
अभी उधार रखो.

- त्रिलोक सिंह ठकुरेला
आबू रोड- ( राजस्थान )

35 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  2. विमल कुमार हेड़ा।29 मार्च 2012 को 10:21 am

    जीवन की ऋतुएँ बदलेंगी,दिन फिर जायेंगे,
    और अचानक आतप वाले मौसम आयेंगे,
    संबंधों की इस गठरी में थोडा प्यार रखो.
    सुन्दर भाव लिये यह गीत, त्रिलोक सिंह जी को बहुत बहुत बधाई,
    धन्यवाद।
    विमल कुमार हेड़ा।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  3. कोमल सुंदर भाव ..
    सुंदर रचना ...
    शुभकामनायें ..!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  4. बहुत सुंदर भाव पूर्ण रचना। त्रिलोकसिंह जी,बधाई स्वीकव्र करें।

    जीवन की ऋतुएँ बदलेंगी,
    दिन फिर जायेंगे,
    और अचानक आतप वाले
    मौसम आयेंगे,
    संबंधों की
    इस गठरी में
    थोडा प्यार रखो.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  5. लौटा देना प्यार
    फिर कभी,
    अभी उधार रखो.............
    बहुत ही सुंदर और कवी की उदारता परिलक्षित सी दीखाई देती है.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  6. अद्भुत शब्द संयोजन और गीत गति के साथ भाव का समन्वय .. आनन्द आ गया - बधाई

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  7. परमेश्वर फुंकवाल29 मार्च 2012 को 5:12 pm

    संबंधों की इस गठरी में थोडा प्यार रखो....एक मृदुल गीत, जीवन सन्देश देता हुआ... बधाई त्रिलोक जी.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  8. लौटा देना प्यार
    फिर कभी,
    अभी उधार रखो
    बहुत सुंदर पंक्तियाँ हैं ये नवगीत की। इस शानदार नवगीत के लिए ठकुरेला जी को बहुत बहुत बधाई

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  9. ज्योत्स्ना शर्मा29 मार्च 2012 को 7:57 pm

    बहुत सरल शब्दों में गहरे भाव लिये ....बहुत बहुत सुन्दर नवगीत है ....बधाई आपको ...!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  10. भावपूर्ण गीत मार्मिक, आशावादी , सकारात्मक -प्रेरणा प्रदान करता है .

    अचानक आतप वाले
    मौसम आयेंगे, ....पंक्तियाँ संघर्षों और दुःख का प्रतीक हैं .
    थोडा प्यार रखो. इस पंक्ती में प्यार को परिभाषित किया है .प्यार से ही सारी दुनिया को जोड़ सकते हैं .जीवन रूपी पुष्प प्यार से ही खिलता है .आज की पीढ़ी के लिए उर्जावान गीत है .
    बधाई .
    मंजु गुप्ता
    वाशी , नवी मुम्बई
    भारत .

    उत्तर देंहटाएं
  11. भावपूर्ण गीत मार्मिक, आशावादी , सकारात्मक -प्रेरणा प्रदान करता है .

    अचानक आतप वाले
    मौसम आयेंगे, ....पंक्तियाँ संघर्षों और दुःख का प्रतीक हैं .
    थोडा प्यार रखो. इस पंक्ती में प्यार को परिभाषित किया है .प्यार से ही सारी दुनिया को जोड़ सकते हैं .जीवन रूपी पुष्प प्यार से ही खिलता है .आज की पीढ़ी के लिए उर्जावान गीत है .
    बधाई .
    मंजु गुप्ता
    वाशी , नवी मुम्बई
    भारत .

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  12. सरल नहीं जीवन का यह पथ,
    मिलकर काटेंगे ,
    हम अपना पाथेय और सुख, दुःख
    सब बाँटेंगे,
    लौटा देना प्यार
    फिर कभी,
    अभी उधार रखो

    पूरा गीत ही बहुत सुन्दर है , सुन्दर भाव और सुन्दर शब्द किन्तु यह पंक्तियाँ तो जीने कॉ मंत्र हैं | बधाई आपको |

    सादर
    शशि पाधा

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  13. ठकुरेला जी बहुत सुन्दर नवगीत रचते हैं, हरसिंगार पर इतना सुन्दर नवगीत लिखने के लिए हार्दिक वधाई।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  14. सरल नहीं जीवन का यह पथ,
    मिलकर काटेंगे ,
    हम अपना पाथेय और सुख, दुःख
    सब बाँटेंगे,
    लौटा देना प्यार
    सुन्दर भाव
    rachana

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  15. गीत मीठा और सकारात्मक है |

    अवनीश तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  16. लौटा देना प्यार
    फिर कभी,
    अभी उधार रखो.
    क्या शब्द दिए हैं भावनाओं को ......बहुत सुन्दर नवगीत त्रिलोक सिंह ठकुरेला जी

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  17. हार्दिक बधाई स्वीकारें भाई त्रिलोक सिंह ठाकुरेला जी इस बहुत अच्छे गीत के लिए| हमारी रागात्मक चेतना को टेरता है यह गीत|

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं
  18. मन के द्वारे पर
    खुशियों के
    हरसिंगार रखो.

    आशा और संभावना के नव दीप जलाता सा नवगीत. आपकी कलम को नमन.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार. धन्यवाद.
      -त्रिलोक सिंह ठकुरेला

      हटाएं

आपकी टिप्पणियों का हार्दिक स्वागत है। कृपया देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करें।