31 मार्च 2012

१२. जीवन हमारा फूल हरसिंगार-सा

जीवन हमारा
फूल हरसिंगार-सा
जो खिल रहा है आज,
कल झर जायगा !

इसलिए, हर पल विरल
परिपूर्ण हो रस-रंग से,
मधु-प्यार से !
डोलता अविरल रहे हर उर
उमंगों के उमड़ते ज्वार से !

एक दिन, आख़िर,
चमकती हर किरण बुझ जायगी...
और चारों ओर
बस, गहरा अँधेरा छायगा !

मत लगाओ द्वार अधरों के
दमकती दूधिया मुसकान पर,
हो नहीं प्रतिबंध कोई
प्राण-वीणा पर थिरकते
ज़िन्दगी के गान पर !

जीवन हमारा
फूल हरसिंगार-सा
एक दिन उड़ जायगा सब ;
फिर न वापस आयगा !

-महेन्द्र भटनागर
ग्वालियर

11 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन की क्षणभंगुरता को हरसिंगार के फूल के माध्यम से प्रस्तुत कर एक बड़ा संदेश दे रहा है महेन्द्र भटनागर जी का यह नवगीत

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  2. जीवन की नश्वरता को याद दिलाता हुआ अति सुन्दर नवगीत ,

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  3. जीवन की नश्वरता को याद दिलाता हुआ अति सुन्दर नवगीत ,

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  4. नवगीत मोहक है .
    शब्दों का चयन ह्रदय को प्रभावित करता है .
    हरसिंगार-सा में उपमा अलंकार है .
    भाषा प्रतीकात्मक है .

    इसलिए, हर पल विरल

    परिपूर्ण हो रस-रंग से,
    मधु-प्यार से !
    डोलता अविरल रहे हर उर
    उमंगों के उमड़ते ज्वार से !.........में प्यार का सौंदर्य है .


    हरसिंगार फूल के द्वारा जीवन शाश्वत नहीं है , नाशवान है का प्रमाण दृष्टिगोचर होता है . जो कटु सत्य है .

    मंजु गुप्ता
    वाशी , नवी मुंबई .
    भारत .

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  5. भूल सुधार उपरोक्त टिप्पणी में रचनाकार का नाम श्री महेन्द्र भटनागर जी का उल्लेख करने के स्थान पर परमेश्वर फूंक्वाल जी का नाम भूलवश हो गया है। क्षमायाची हूं

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  6. कथ्य शिल्प हर दृष्टि से सधे हुए नवगीत के लिए महेन्द्र भटनागर जी को बधाई

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  7. मत लगाओ द्वार अधरों के
    दमकती दूधिया मुसकान पर,
    हो नहीं प्रतिबंध कोई
    प्राण-वीणा पर थिरकते
    ज़िन्दगी के गान पर !
    मोहक नवगीत बधाई
    rachana

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  8. हरसिंगार के माध्यम से जीवन की नश्वरता को इंगित करता शब्द-सम्पदा, भाव-सम्पदा और कल्पना की सामर्थ्य को उद्घाटित करता मर्मस्पर्शी नवगीत हेतु आपको प्रणाम.

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