30 नवंबर 2012

समय का पहिया चलता जाए


हर नया दिन, एक दिन पुराना हो जाता है और पुराना फिर से आता है नया रूप रखकर, पर गया समय वापस नहीं आता। समय और जीवन, जीवन और समय साल दर साल संतुलन बाँधे बढ़ते जाते हैं। जीवन अपने लक्ष्य की ओर निरंतर और समय इनसे अनभिज्ञ अपनी गति से। इसीलिये समय की तुलना पहिये से भी की गई है। हर समय परिवर्तन की गाँठ पर हम समय का उत्सव मनाते हैं चाहे व अँग्रेजी नववर्ष के अनुसार हो या किसी अन्य... तो इस बार नये साल से पहले समय के उत्सव, जीवन के लक्ष्य और इन सबके संतुलन पर आधारित है हमारी कार्यशाला। शीर्षक किसी गीत में नहीं आना चाहिये। सबकुछ जो यहाँ लिखा गया है वह गीत में समाहित हो जाय उसकी कोशिश भी नहीं करनी चाहिये। कुछ नवता कुछ लय सभी सदस्य प्रस्तुत कर सकें तो बहुत अच्छा होगा। रचना भेजने की अंतिम तिथि १५ दिसंबर है। जल्दी आने वाली रचनाओं का प्रकाशन पहले शुरू हो जाएगा। पता वही है- navgeetkipathshala@gmail.com

2 टिप्‍पणियां:

  1. हार्दिक शुभकामनाएं पिछली कार्यशाला की सफलता के लिए तथा अगली कार्यशाला की उद्घोषणा के लिए।

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  2. समय के पहिए पर 25वी कार्यशाला का हम हार्दिक स्वागत करते हैं।

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