3 नवंबर 2012

१५. जाने क्या लिख गई अमावस

हल्दी भरे हाथ की थापें मार कर
जाने क्या लिख गई अमावस
लिपी-पुती दीवार पर

तोड़ गई मज़दूरिन मकड़ी का
झीना छींका
आले में रख गई सुनहरी
झुमका चमकीला
गेंदे की मेहराब सजा कर द्वार पर
जाने क्या लिख गई अमावस
लिपी-पुती दीवार पर


आँगन में
कालीन केसरी बिछा गई पगली
चौकी पर
दो-तीन मूर्तियाँ रख कर भली-भली
एकदन्त पर खिल-बताशे वार कर
जाने क्या लिख गई अमावस
लिपी-पुती दीवार पर

--रमेश रंजक

6 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ अच्‍छा ही लिख जाती है ये अमावस ..
    शुभकामनाएं ..

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  2. बहुत सुंदर नवगीत है ये रमेश जी का, उन्हें बहुत बहुत बधाई

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  3. जाने क्या लिख गई अमावस
    लिपी पुती दिवार पर

    सुन्दर नवगीत के लिए रमेश जी को बधाई ।

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  4. आँगन में
    कालीन केसरी बिछा गई पगली
    चौकी पर
    दो-तीन मूर्तियाँ रख कर भली-भली
    एकदन्त पर खील-बताशे वार कर
    जाने क्या लिख गई अमावस
    लिपी-पुती दीवार पर

    इन पंक्तियों में पर्व की सुखानुभूति है एक ओर तो दूसरी ओर जो घनीभूत अमावस है हमारे आज के समय में, उसकी ओर भी इंगित है| साधुवाद 'नवगीत पाठशाला' को इस रचना के माध्यम से श्रद्धेय भाई रमेश रंजक को इस पावन पर्व पर स्मरण करने के लिए|

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  5. नवगीत बहुत अच्छा बन पडा है। हार्दिक बधाई

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  6. बहुत सुन्दर नवगीत के लिये रमेश रंजक जी को वधाई

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