11 दिसंबर 2012

३. नव वर्ष

चालक- पथ की
जीवन रथ की
लेकर नव भाषाएँ
आया है
नव वर्ष हमारा
जागीं सब आशाएँ

नये रंगों से
रंगी ज़िन्दगी
रंगोली-सी सोहे
सात सुरों से
सजा केशियो
जैसे तन-मन मोहे
चलो समय का
पहिया घूमा
बदलीं परिभाषाएँ!

फूल-फूल में
प्रेम बढ़ेगा
महकेगी फुलवारी
धूप-चाँदनी,
बरखे बरखा
लहकेगी हर क्यारी
झोली में
सबके फल होंगे-
पूरी अभिलाषाएँ!

--अवनीश सिंह चौहान

8 टिप्‍पणियां:



  1. फूल-फूल में
    प्रेम बढ़ेगा
    महकेगी फुलवारी
    धूप-चाँदनी,
    बरखे बरखा
    लहकेगी हर क्यारी
    झोली में
    सबके फल होंगे-
    पूरी अभिलाषाएँ
    सकारात्मक विचारों से ओतप्रोत सुंदर भावपूर्ण नवगीत
    अश्विनी जी बधाई आपको

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  2. बहुत सुन्दर गीत अवनीश जी
    फूल-फूल में
    प्रेम बढ़ेगा
    महकेगी फुलवारी
    धूप-चाँदनी,
    बरखे बरखा
    लहकेगी हर क्यारी
    झोली में
    सबके फल होंगे-
    पूरी अभिलाषाएँ!......बहुत शुभ कल्पना...

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  3. बहुत सुंदर नवगीत लिखा है अवनीश जी ने, उन्हें बहुत बहुत बधाई

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  4. नववर्ष की सुन्दर भावनाओँ को जगाता नवगीत , हार्दिक बधाई अवनीश जी ।

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  5. अनिल वर्मा, लखनऊ.13 दिसंबर 2012 को 6:51 pm

    चलो समय का
    पहिया घूमा
    बदलीं परिभाषाएँ! बहुत ही सुन्दर. सुन्दर नवगीत के लिये हार्दिक बधाई अवनीश जी.

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  6. बहुत सुंदर नवगीत अवनीश जी । बहुत बहुत बधाई

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  7. नये रंगों से
    रंगी ज़िन्दगी
    रंगोली-सी सोहे
    सात सुरों से
    सजा केशियो
    जैसे तन-मन मोहे

    अच्छा अन्तर्विरोध... नवगीत का शिल्प?

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  8. कृष्ण नन्दन मौर्य20 दिसंबर 2012 को 7:09 am

    सुंदर नवगीत अवनीश जी,बधाई।

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