15 दिसंबर 2012

५. डायरी पढ़ते हुए

विगत यादों की
सुनहरी सीढ़ियाँ चढ़ते हुये
मज़ा आता है
पुरानी डायरी पढ़ते हुये

फिर किसी की
चूड़ियों से दिन खनकने हैं लगे
तोतले संवाद
आँगन घूमने फिरने लगे
जी जुड़ाया बहुत
गुज़रे दौर से जुड़ते हुये

चिल्ल–पों, ऊधम
शरारत, खिलखिलाहट, तालियाँ
नाचती हैं फिर
नयन में होलियाँ, दीवालियाँ
दिख रही हैं कढ़ाई
में पूड़ियाँ कढ़ते हुये

टीसते हैं घाव
टहनी दर्द की अब भी हरी है
टूटता है भ्रम कि
जीवन हँसी–ठट्टा मसखरी है
पाँव के छालों
तुम्हारी आरती गढ़ते हुये

– रवि शंकर मिश्र "रवि"

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर गीत रवि जी ........विशेष कर इन पंक्तियों के लिए विशेष बधाई

    मज़ा आता है
    पुरानी डायरी पढ़ते हुये
    तोतले संवाद
    आँगन घूमने फिरने लगे
    जी जुड़ाया बहुत
    गुज़रे दौर से जुड़ते हुये
    बहुत बहुत बधाई ............

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  2. भावपूर्ण गीत..... भाई रबिशंकर जी...! ब्धाई

    किन्तु वर्तनी भ्रम है अथवा आपका मन्तव्य कुछ ऒर.. . मुझे लगा आप.. .

    कड़ाही में पूड़ियाँ तलते हुये कहना चाहते हैं । कृपया स्पष्ट करें।

    सप्रेम

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    1. श्रीकान्त जी, अवधी में तलने के स्थान पर काढ़ने शब्द का प्रयोग धड़ल्ले से होता है। अतः सुविधा के लिये कढ़ते शब्द का इस्तेमाल कर लिया है, और कोई बात नहीं

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  3. गीत का मुखड़ा बहुत ही सुंदर है। अनोखी कल्पना से सजे सुंदर नवगीत के लिए रविशंकर जी को हार्दिक बधाई।

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  4. जी जुड़ाया बहुत
    गुज़रे दौर से जुड़ते हुये
    .............
    टीसते हैं घाव
    टहनी दर्द की अब भी हरी है
    टूटता है भ्रम कि
    जीवन हँसी–ठट्टा मसखरी है
    पाँव के छालों
    तुम्हारी आरती गढ़ते हुये........ सुन्दर गीत मिश्र जी, बधाई आपको

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  5. भाई रविशंकर का यह गीत बहुत अच्छा बन पड़ा है - इसके बिम्ब एकदम सीधे जीवन के आम अनुभवों से उपजे हैं। नवगीत की यह भंगिमा ही उसे आज की प्रतिनिधि कविता बनाती है। मेरा हार्दिक साधुवाद 'रवि' जी को!

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    1. आपका आशीर्वाद मेरे लिये बहुत ही उत्साहवर्धक है। बहुत बहुत आभार

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  6. सुन्दर नवगीत के लिए रविशंकर जी को हार्दिक बधाई ।

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  7. टीसते हैं घाव
    टहनी दर्द की अब भी हरी है
    टूटता है भ्रम कि
    जीवन हँसी–ठट्टा मसखरी है
    पाँव के छालों
    तुम्हारी आरती गढ़ते हुये

    रवि जी! इस अनुष्ठान की अब तक की श्रेष्ठ प्रस्तुति हेतु बधाई. .

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    1. आपकी यह टिप्पणी मेरे लिये बहुत महत्व रखती है। हौसलाअफज़ाई के लिये बहुत बहुत आभार

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  8. कृष्ण नन्दन मौर्य20 दिसंबर 2012 को 7:16 am

    बहुत ही सुन्दर और प्यारा नवगीत.गीत की हर पंक्ति और पंक्तियों में छिपा हर भाव लाजवाब.बधाई रविशंकर जी.

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