16 दिसंबर 2012

६. नए साल ने जैसे ही कुंडी खड़काई

बाजारों में सजी दुकानें
बार, पबों में रौनक छाई
नए साल ने
जैसे ही कुंडी खड़काई

शॉपिंग मॉल सजे दुल्हन से
ख़ुशी छलकती तन से, मन से
लूट मची है दूकानों में
भरें तिजोरी खाली, धन से
बार-बी-क्यू की खुशबू फैली
सबके मन को भाई
नए साल ने
जैसे ही कुंडी खड़काई

कुछ पीकर के मस्त हो गए
बार गली में व्यस्त हो गए
नाईट क्लबों में डांस कर रहे
जोड़े थककर ध्वस्त हो गए
सजी-धजी संध्या बाला ने
फिर से ली अँगड़ाई
नए साल ने
जैसे ही कुंडी खड़काई

कुछ ड्रग खा ग़म भूल रहे हैं
सपन लोक में झूल रहे हैं
कुछ ‘गे’ जोड़े ‘किस’ करने में
कोने में मशगूल रहे हैं
लिये हाथ में बियर की बोतल
खड़े हुए सौदाई
नए साल ने
जैसे ही कुंडी खड़काई

पिकिनक सारे लोग मनाते
फायर वर्क्स देखने आते
नए साल का स्वागत करने
हार्बर ब्रिज भरपूर सजाते
सिडनी वासी उमड़ पड़े ले
खाना और चटाई
नए साल ने
जैसे ही कुंडी खड़काई

रेखा राजवंशी
सिडनी, ऑस्ट्रेलिया

7 टिप्‍पणियां:

  1. नए साल ने
    जैसे ही कुंडी खड़काई...सुन्दर मुखड़ा और सुन्दर गीत

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  2. सिडनी, ऑस्ट्रेलिया के परिवेश में नववर्ष - नवगीत के कथ्य का विस्तार नये अनुभवों और नई अनुभूतियों तक।इस श्रेष्ठ रचना के लिए रेखा राजवंशी को मेरा हार्दिक अभिनन्दन।

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  3. रेखा जी की अनुभूतियाँ उस लोक में ले जा रही हैं जो ग्राम्य भारत के लिए प्रायः अछूता किन्तु महानगरों और कस्बाई नगरों के युवाओं का आकर्षण केंद्र है. सटीक अभिव्यक्ति...

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  4. कृष्ण नन्दन मौर्य20 दिसंबर 2012 को 7:20 am

    हार्बर ब्रिज सिडनी की आतिशबाजी तो वाकई कमाल की होती है.ऑस्ट्रेलिया के परिवेश में नववर्ष का वर्णन करती सुन्दर रचना.

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  5. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण नवगीत । बधाई ।

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  6. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण नवगीत । बधाई ।

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