19 मार्च 2013

९. होली के रंग

होली का हर
रंग अनोखा।

रंगी हथेली लेकर दौड़े
दूर हुए सब मन के घोड़े,
चली गई मुस्कानें देकर
बोझिल मन पर चले हथौड़े,
साथ रह गया
लेखा-जोखा।

भूल गए वो ढाई आखर
पथ में साथ किसी का पाकर,
अनजानी रह गई विरासत
प्रीत हुई बेदम अकुलाकर,
किसके साथ हुआ
क्या धोखा।

मौसम ने कर ली मनमानी,
दिशा-दिशा में चादर तानी,
उड़े रंग के बादल नभ में,
भूतल भरा समंदर पानी,
मत करना तुम
बंद झरोखा।

-महेश सोनी

2 टिप्‍पणियां:

  1. रंगी हथेली लेकर दौड़े
    दूर हुए सब मन के घोड़े,
    चली गई मुस्कानें देकर
    बोझिल मन पर चले हथौड़े,
    साथ रह गया
    लेखा-जोखा।सुंदर पंक्तियाँ....

    महेश जी, आपका नवगीत पहली बार पढ़ा। बहुत सुंदर लगा, हार्दिक बधाई...

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. कल्पना जी, सबसे पहले तो आपको होली पर्व की ढेरों शुभकामनाएं।
      आपने मेरे गीत को सराहा इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद

      हटाएं

आपकी टिप्पणियों का हार्दिक स्वागत है। कृपया देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करें।