24 जुलाई 2013

३. महक उठी अंगनाई



चम्पा चटकी इधर डाल पर
महक उठी अंगनाई

उषाकाल नित
धूप तिहारे चम्पा को सहलाए
पवन फागुनी लोरी गाकर
फिर ले रही बलाएँ

निंदिया आई अखियों में और
सपने भरे लुनाई  . 

श्वेत चाँद सी
पुष्पित चम्पा कल्पवृक्ष सी लागे
शैशव चलता ठुमक ठुमक कर
दिन तितली से भागे

नेह अरक में डूबी पैंजन -
बजे खूब शहनाई.

-शशि पुरवार
जलगाँव

39 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. शशि जी ,बेहतरीन गीत ,विशेष कर
      यह लाइन्स शैशव चलता ठुमक ठुमक कर
      दिन तितली से भागे.बधाई मंजुल भटनागर

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    2. दीदी : बहुत खूबसूरत रचना... साक्षात् का अनुभव कराती हुई पंक्‍तियाँ :-)

      बधाई हो :-)

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  2. बहुत सुन्दर !
    चम्पा चटकी इधर डाल पर
    महक उठी अंगनाई......क्या ख़ूब शब्द-संयोजन है, वाह ! दूसरा अंतरा तो बेजोड़ है चाक्षुस, श्रव्य, और गतिमय बिम्बों की दृष्टि से...
    श्वेत चाँद सी
    पुष्पित चम्पा कल्पवृक्ष सी लागे
    शैशव चलता ठुमक ठुमक कर
    दिन तितली से भागे

    नेह अरक में डूबी पैंजन -
    बजे खूब शहनाई...............ह्रदय से बधाई शशि जी इस मधुर नवगीत के लिए !

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  3. सुन्दर नवगीत के लिए बधाई शशि पुरवार जी।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बृहस्पतिवार (25-07-2013) को हौवा तो वामन है ( चर्चा - 1317 ) पर "मयंक का कोना" में भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. बहुत सुन्दरं नवगीत । शशि जी आपने बहुत खूबसूरत उपमानों का प्रयोग किया है । हार्दिक बधाई !

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  6. बहुत ही सुंदर शब्द विन्यास के साथ मनोहारी अभिव्यक्ति

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  7. सुंदर शब्द विन्यास से सजी मनोहर अभिव्यक्ति

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  8. सुन्दर अभिव्यक्ति शशि जी उम्दा पंक्तियां .श्वेत चाँद सी
    पुष्पित चम्पा कल्पवृक्ष सी लागे
    शैशव चलता ठुमक ठुमक कर
    दिन तितली से भागे

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  9. है गुलाब फूलों का राजा,लिली फूल की रानी ,
    चम्पा है फूलों की देवी ,
    रूप सुगंध समानी !

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  10. बहुत सुंदर...शशि जी को हार्दिक बधाई

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  11. कितना सुन्दर गीत लिखा आपने ...वाह ...ठुमकता हुआ गीत है ...हार्दिक मंगलकामना

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  12. khubsurat navgeet..
    kahan se dhundh pate ho, itne khubsurat shabdo ko :)
    behtareen!

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  13. मंजुल जी , सचिन , अश्विनी जी , सुरेन्द्र पाल जी ,तुषार जी ,शास्त्री जी ,अजय जी ,कल्पना जी ,संध्या जी ,कम्बोज जी ,दीपिका जी ,तेला जी ,प्रतिभा जी ,मुकेश .आप सभी का तहे दिल से आभार ,आपने गीत को पसंद करके अपनी अनमोल टिप्णी से उत्साहवर्धन किया . :)

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  14. शशि जी बधाई। बड़ी सुखद अनुभूति हुई आपको नवगीत लिखते देखकर। अब आप बढ़िया नवगीत लिखेंगी। संक्षिप्त ताने-बाने में रचा गया नवगीत।

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  15. बहुत मनोहर गीत शशि पुरवार जी .. स्वागत है।

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    2. कांत जी तहे दिल से आभार ,आपने गीत को पसंद करके अपनी अनमोल टिप्णी से उत्साहवर्धन किया . :)

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  16. बहुत मनोहर गीत शशि पुरवार जी .. स्वागत है।

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  17. बहुत ही प्यारा नवगीत है शशि जी ,हार्दिक बधाई आपको इतना मनोहारी लिखने के लिए

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    1. जी तहे दिल से आभार शुक्ल जी ,आपने गीत को पसंद करके अपनी अनमोल टिप्णी से उत्साहवर्धन किया . :)

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  18. अनिल वर्मा26 जुलाई 2013 को 7:41 am

    बहुत ही मोहक. लाजवाब रचना के लिये हार्दिक बधाई शशि जी.

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  19. यह गीत शशी जी आपके लेखन के प्रति अदम्य उत्साह का प्रतीक है....अब आप तितली की तरह उड़ रही हैं ....Bon Voyage..

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    1. जी तहे दिल से आभार परमेश्वर जी ,आपने गीत को पसंद करके अपनी अनमोल टिप्णी से उत्साहवर्धन किया . :)

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  20. नेह अरक में डूबी पैंजन -
    बजे खूब शहनाई........सचमुच शहनाई सा बजता गीत है आपका ...बहुत बधाई ..शशि जी

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  21. सुन्दर नवगीत के लिए बधाई शशि पुरवार जी

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  22. सुन्दर नवगीत.... बधाई!
    डॉ सरस्वती माथुर

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  23. सुंदर नवगीत है। शशि पुरवार जी को बहुत बहुत बधाई

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  24. उत्तर
    1. सरस्वती जी जी .सज्जन जी ,brajesh ji तहे दिल से आभार ,आपने गीत को पसंद करके अपनी अनमोल टिप्णी से उत्साहवर्धन किया . :) ,

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  25. कृष्ण नन्दन मौर्य13 अगस्त 2013 को 10:12 am

    उषाकाल नित
    धूप तिहारे चम्पा को सहलाए
    पवन फागुनी लोरी गाकर
    फिर ले रही बलाएँ

    निंदिया आई अखियों में और
    सपने भरे लुनाई . ..........

    श्वेत चाँद सी
    पुष्पित चम्पा कल्पवृक्ष सी लागे
    शैशव चलता ठुमक ठुमक कर
    दिन तितली से भागे

    नेह अरक में डूबी पैंजन -....... लाजवाब रचना...

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    1. जी तहे दिल से आभार कृष्ण नन्दन ji ,आपने गीत को पसंद करके अपनी अनमोल टिप्णी से उत्साहवर्धन किया . :)

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