29 दिसंबर 2013

१९. नये नये सपने आँखों में

नये नये सपने आँखों में
भीतर का विश्वास नया है
नया नहीं है यूँ तो कुछ भी
पर मन का
उल्लास नया है

उलझ गया पाँवों में दफ्तर
मौसम हमसे सँभल न पाया
जीवन की आपाधापी में
कैलेण्डर तक बदल न पाया
पर मन की आँखों से देखो
धरा नयी
आकाश नया है

कसें इरादों की मुट्ठी फिर
पर में नयी उड़ानें बाँधें
जिनके सुर कुछ भटक गये थे
फिर से वही तराने साधें
टूटे संकल्पों को फिर से
जीने का
एहसास नया है

जाने अनजाने चेहरों पर
चमक रहा हैप्पी न्यू ईयर
मोबाइल के दिल में रह रह
धड़क रहा हैप्पी न्यू ईयर
नये साल में सब कुछ शुभ–शुभ
होने का
आभास नया है

–रविशंकर मिश्र रवि
(प्रतापगढ़)

1 टिप्पणी:

  1. कसें इरादों की मुट्ठी फिर
    पर में नयी उड़ानें बाँधें
    जिनके सुर कुछ भटक गये थे
    फिर से वही तराने साधें
    सार्थक प्रणों से नए वर्ष का स्वागत करता है आपका यह सुन्दर गीत.. बधाई.

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