19 जुलाई 2014

१५. इक लहर बारिश- कृष्णनंदन मौर्य

इक लहर बारिश की क्या आई
धँस गया चकरोड
पुलिया ढह गई।

घर बने तालाब
गलियारे नहर
बूँद भर में, डूब–उतराया शहर
इक लहर बारिश की क्या आई
रोड पर जैसे
नदी ही बह गई।

भीड़ फर्राटा
घिसटती जाम में
खास भी कुछ, आ फँसे हैं आम में
इक लहर बारिश की क्या आई
पालिका की पोल
सारी कह गई।

हुईं टापू
रेहड़ियाँ, पैदल–पथों की
आज आमद नहीं ठेलों–खोमचों की
इक लहर बारिश की क्या आई
कीच ही केवल
असर में रह गई।

- कृष्ण नन्दन मौर्य
प्रतापगढ़

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

आपकी टिप्पणियों का हार्दिक स्वागत है। कृपया देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करें।