25 मार्च 2012

५. आने वाले स्वागत

आनेवाले ! स्वागत !
जानेवाले ! विदा !
अगले चौराहे पर इन्तज़ार...
शुक्रिया !

ख़त लिखना- फागुनी बतास जब खुले !
हाँ, लिखना- दूध में गुलाल जब घुले !
लिखना जी : फूले जब हरसिंगार...
शुक्रिया !

बौर लगे आमों का हाल चाल भी लिखना !
मधु मासे बौने मन की उछाल भी लिखना !
लिखना : जब झुक-झूमे नीम-डार...
शुक्रिया !

लिखना : पोखर-तीरे हंस युग्म का होना ।
किरणों सिरहाने रखकर लहरों का सोना ।
लिखना : जब जलकुम्भी हो उधार...
शुक्रिया !

-शलभ श्रीराम सिंह

10 टिप्‍पणियां:

  1. बौर लगे आमों का हाल चाल भी लिखना !
    मधु मासे बौने मन की उछाल भी लिखना !
    बहुत अच्छा गीत है ...पाती लिखने का निवेदन भा गया ...बधाई शलभ श्री राम जी

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  2. बहुत सुंदर नवगीत है ये शलभ श्रीराम सिंह जी का। उन्हें तो जितनी बार पढ़ो मन नहीं भरता।

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  3. विमल कुमार हेड़ा।26 मार्च 2012 को 8:13 am

    लिखना : पोखर-तीरे हंस युग्म का होना ।
    किरणों सिरहाने रखकर लहरों का सोना ।
    सुन्दर गीत के लिये शलभ श्रीराम जी को बहुत बहुत बधाई
    धन्यवाद
    विमल कुमार हेड़ा।

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  4. आदरणीय शलभ जी,
    ख़त लिखना- फागुनी बतास जब खुले !
    हाँ, लिखना- दूध में गुलाल जब घुले !
    लिखना जी : फूले जब हरसिंगार

    पहली बार इस अंदाज़ में लिखा नवगीत पढ़ा | धन्यवाद|

    शशि पाधा

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  5. पत्र लिखने की लुप्त होती परंपरा के समय में यह अनुरोध भरा गीत बहुत ही अच्छा लगा उस पर प्रकृति का सौन्दर्य ...विविधता लिए...अतिसुन्दर.

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  6. ख़त लिखना- फागुनी बतास जब खुले !
    हाँ, लिखना- दूध में गुलाल जब घुले !
    लिखना जी : फूले जब हरसिंगार...
    शुक्रिया !
    नए अंदाज का नवगीत
    अति सुंदर

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  7. लिखते : हाँ जी टिप्पणी
    आशावादी गीत पत्रात्मक शैली का अद्भुत प्रयोग है .
    प्रकृति के चित्रात्मक चित्रण सुंदर है .

    लिखते : आपको बधाई .

    मंजु गुप्ता
    वाशी , नवी मुम्बई .
    भारत .

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  8. नवगीत के शिल्प को नव आयाम देता, सटीक शब्द-चयन, सम्यक प्रतीक एवं सार्थक बिम्बों से संपन्न इस नवगीत हेतु हार्दिक बधाई.

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