2 मई 2011

२९. बस इतना सा समाचार है

बस इतना सा समाचार है

घूरे पर बैठा बच्चा
खाने को कुछ भी बीन रहा है
लगता है बिधना से लड़कर
अपना जीवन छीन रहा है
क्या इसको भी जीना कहते
आता मन में यह विचार है
बस इतना सा समाचार है

अपने बालों के झुरमुट से
जाने क्या वो खींच रही है
बूढ़ी दादी गिने झुर्रियाँ
गले मसूढे भींच रही है
जीने की इच्छा तो मृत है
मरने तक ज़िंदगी भार है
बस इतना सा समाचार है

बिटिया की शादी सर पर है
कैसे बेड़ा पार लगेगा
कुछ दहेज़ तो देना होगा
वरना सब बेकार लगेगा
रिश्तेदार कसेंगे ताने
अपनी बिटिया बनी भार है
बस इतना सा समाचार है

अब की बार फसल अच्छी हो
तो कुछ घर में काम कराऊँ
टपक रही झोपडी इसे भी
नए प्लास्टिक से ढंकवाऊँ
कई दिनों से खांस रहा हूँ
छोटी बिटिया को बुखार है
बस इतना सा समाचार है

शेषधर तिवारी
(इलाहाबाद)

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर नवगीत है, मेरे विचार में इसका मुखड़ा "बस इतना सा समाचार है" होगा। तिवारी जी को बहुत बहुत बधाई।

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  2. कई दिनों से खांस रहा हूँ
    छोटी बिटिया को बुखार है
    बस इतना सा समाचार है

    waah tivari ji

    sundar bhaav piroye hain

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  3. बहुत सुन्दर भावना पूर्ण नवगीत| धन्यवाद|

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  4. बस इतना ...!
    यह तो बहुत ज्यादा है आँखे भिगो देने को
    शानदार नवगीत... बधाई

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  5. बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैँ और भाव सटीक और मजबूत हैँ...

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  6. भाई शेष धर तिवारी जी का अद्भुत नवगीत| बहुत बहुत बधाई|

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  7. शेषधर जी,
    जीवन के विविध मर्मस्पर्शी आयामों को स्पर्श करता हुआ आपका यह नवगीत अच्छा लगा।
    सादर
    अमित

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  8. घूरे पर बैठा बच्चा
    खाने को कुछ भी बीन रहा है
    लगता है बिधना से लड़कर
    अपना जीवन छीन रहा है
    ... ...
    अपने बालों के झुरमुट से
    जाने क्या वो खींच रही है
    बूढ़ी दादी गिने झुर्रियाँ
    गले मसूढे भींच रही है

    हाँ, ऐसी ही पंक्तियाँ किसी गीत को नवगीत बनाती हैं| साधुवाद है भाई शेषधर तिवारी को एक श्रेष्ठ नवगीत हेतु | इस नवगीत पाठशाला की निश्चित ही यह एक उपलब्धि-रचना है|
    कुमार रवीन्द्र

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  9. अब की बार फसल अच्छी हो
    तो कुछ घर में काम कराऊँ
    टपक रही झोपडी इसे भी
    नए प्लास्टिक से ढंकवाऊँ
    कई दिनों से खांस रहा हूँ
    छोटी बिटिया को बुखार है
    बस इतना सा समाचार है

    भाव पूर्ण नवगीत बधाई

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  10. आप सभी को उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद देता हूँ. कुमार रविन्द्र जी की ये पंक्तियाँ
    "हाँ, ऐसी ही पंक्तियाँ किसी गीत को नवगीत बनाती हैं| साधुवाद है भाई शेषधर तिवारी को एक श्रेष्ठ नवगीत हेतु | इस नवगीत पाठशाला की निश्चित ही यह एक उपलब्धि-रचना है|" मेरे लिए पुरस्कार हैं.

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